“जालोर गणपत सिंह हत्याकांड: 16 माह से अनसुलझी गुत्थी, परिवार भूख हड़ताल पर—CBI जांच की मांग तेज़”
16 महीने बाद भी न्याय दूर! परिवार भूख हड़ताल पर, CBI जांच की उठी मांग
जालोर। जिले के मांडोली गांव में हुए गणपत सिंह हत्याकांड को 16 महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन आज भी मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। परिजन और समाज के लोग लगातार प्रशासन पर ढिलाई और गंभीरता की कमी का आरोप लगा रहे हैं। इसी नाराज़गी के चलते मृतक का परिवार अब कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गया है।
क्या है पूरा मामला ?
28 अगस्त 2022 को गणपत सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे। उनके सिर पर गहरी चोट के निशान थे, जिसके बाद परिवार ने इसे स्पष्ट रूप से हत्या बताया। परिजनों ने शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन कई महीनों की जांच के बाद भी न तो कोई गिरफ्तारी हुई, न ही पुलिस किसी ठोस नतीजे पर पहुंच सकी।
जांच में धीमी गति पर सवाल….
मामले की जांच पहले एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई थी, लेकिन उनके तबादले के बाद जांच की गति लगभग थम गई। कुछ संदिग्धों के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया भी अदालत और तकनीकी शर्तों में उलझकर अधूरी रह गई। परिवार का आरोप है कि “पुलिस सिर्फ औपचारिकता निभा रही है, जबकि वास्तविक कार्रवाई शून्य है।”
परिवार की पीड़ा—बूढ़ी मां से लेकर बच्चे तक धरने पर…
गणपत सिंह की पत्नी भारती कंवर, उनके छोटे बच्चे, जेठानी और लगभग 80 वर्षीय मां हवा कंवर लगातार धरने पर बैठे हैं।
परिवार का कहना है—
“16 महीने से हम सिर्फ आश्वासन सुन रहे हैं। अब हमारी माँ की सेहत खराब होने लगी है, लेकिन हम न्याय के बिना वापस नहीं लौटेंगे।”
CBI जांच की मांग जोर पर….
परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि अब वे केवल CBI जांच ही चाहते हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हुई है और कई अहम तथ्य दबाए जा रहे हैं। समाज के लोग भी परिवार के साथ खड़े हैं और यह मामला अब एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
हालांकि प्रशासन की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन किसी भी बयान में ठोस कार्रवाई या समयसीमा नहीं बताई गई।
स्थानीय लोग भी पूछ रहे हैं—
“जब एक साधारण परिवार का मामला 16 महीनों बाद भी नहीं सुलझा, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?”
भूख हड़ताल जारी, संघर्ष और तेज़
परिवार का कहना है कि जब तक CBI जांच की घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने पर बैठे लोगों की सेहत गिरती जा रही है, लेकिन उनके हौसले नहीं टूट रहे।
गणपत सिंह हत्याकांड अब सिर्फ एक अपराध का मामला नहीं रहा—यह न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है।
परिवार, समाज और स्थानीय लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं—
“आखिर 16 महीनों बाद भी न्याय क्यों अधूरा है?”