टैरिफ डील के बीच वाशिंगटन में जयशंकर-रुबियो की मुलाकात
जानिए क्यों है यह बैठक भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए खास
न्यूयॉर्क:
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। यह अहम बैठक महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर होने वाली पहली मंत्रिस्तरीय बैठक से ठीक पहले हुई। रुबियो ने अमेरिकी विदेश विभाग में जयशंकर का स्वागत किया।
क्या-क्या हुई बातचीत?
मुलाकात के बाद जयशंकर ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलकर बेहद खुशी हुई। दोनों नेताओं के बीच:
- भारत-अमेरिका द्विपक्षीय सहयोग योजनाओं
- क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों
- व्यापार, ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, रक्षा
- महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत प्रौद्योगिकी
जैसे अहम विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
इसके साथ ही साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों की जल्द बैठकें आयोजित करने पर भी सहमति बनी।
स्कॉट बेसेंट से भी अहम मुलाकात
रुबियो से मिलने से पहले जयशंकर ने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से भी उच्च स्तरीय और “उपयोगी चर्चा” की।
इस बैठक का फोकस था:
- रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना
- भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना
अमेरिकी विदेश विभाग ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश विभाग के बयान के मुताबिक:
- सेक्रेटरी रुबियो और मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का स्वागत किया
- दोनों नेताओं ने क्वाड के जरिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई
- इस बात पर सहमति बनी कि समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों देशों के साझा हितों के लिए बेहद अहम है
टैरिफ डील से सीधा कनेक्शन
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ऐलान किया कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं।
- पारस्परिक टैरिफ 25% से घटाकर 18%
- पहले भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ की आशंका थी, अब बड़ी राहत
यह डील ट्रंप-मोदी फोन कॉल के बाद सामने आई और इसे दोनों देशों के रिश्तों में टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
क्यों खास है जयशंकर-रुबियो की यह बैठक?
यह मुलाकात सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम है।
मुख्य वजहें:
- लिथियम, कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई चेन
- इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए रणनीतिक साझेदारी
- चीन पर निर्भरता कम करने की साझा कोशिश
- भारत-अमेरिका तकनीकी और रक्षा सहयोग को नई मजबूती