नेतन्याहू के भारत दौरे से पहले जयशंकर का बड़ा कूटनीतिक दांव, अरब देशों को एक मंच पर लाकर दिया वैश्विक संदेशभारत बना मिडिल ईस्ट डिप्लोमेसी का केंद्र
नेतन्याहू के भारत दौरे से पहले जयशंकर का बड़ा कूटनीतिक दांव, अरब देशों को एक मंच पर लाकर दिया वैश्विक संदेश
भारत बना मिडिल ईस्ट डिप्लोमेसी का केंद्र
इजरायल यात्रा और नेतन्याहू दौरे के बीच सटीक टाइमिंग
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर हाल ही में दिसंबर 2025 में इजरायल का दौरा कर चुके हैं और अब प्रधानमंत्री नेतन्याहू के भारत आगमन की तैयारियां चल रही हैं। कूटनीतिक हलकों में इस टाइमिंग को भारत की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है, जिससे भारत ने इजरायल और अरब देशों — दोनों को यह संदेश दिया कि वह क्षेत्रीय संतुलन साधने की क्षमता रखता है।
फिलिस्तीन ने भारत को बताया संभावित मध्यस्थ…
बैठक में शामिल फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने भारत की भूमिका को खुलकर सराहा। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है, जिसके पास इजरायल और अरब देशों — दोनों से संवाद करने की विश्वसनीयता है। फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने और शांति प्रक्रिया में सक्रिय हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
इजरायल के साथ सुरक्षा सहयोग भी बरकरार
भारत-इजरायल संबंधों में भी मजबूती बनी हुई है। जयशंकर की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया। रक्षा सहयोग के तहत ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस से जुड़े विषयों पर बातचीत आगे बढ़ी है, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और गहरा करती है।
अरब देशों के साथ ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी
दूसरी ओर, भारत ने अरब देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर सहयोग को प्राथमिकता दी। 22 अरब देशों की एक साथ मौजूदगी ने यह साफ किया कि भारत मिडिल ईस्ट में केवल सुरक्षा साझेदार नहीं, बल्कि आर्थिक और विकास सहयोगी के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत-अरब बैठक में UAE की अहम भूमिका
इस बैठक की सह-अध्यक्षता संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने की, जो भारत-अरब संबंधों में उसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में अरब देशों को साझेदार बनाकर आगे बढ़ना चाहता है।
IMEC और ग्लोबल साउथ की रणनीति
बैठक में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को लेकर भी चर्चा हुई, जिसे एशिया-यूरोप कनेक्टिविटी का अहम विकल्प माना जा रहा है। इसके साथ ही भारत, BRICS की अध्यक्षता के तहत खुद को ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी सक्रिय है, जहां अरब देशों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत का बढ़ता वैश्विक कद
इजरायल और अरब देशों — दोनों के साथ समानांतर संवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब मिडिल ईस्ट में केवल एक बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि संतुलनइजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रस्तावित भारत दौरे से ठीक पहले भारत ने मिडिल ईस्ट कूटनीति में अहम कदम उठाया है। 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक (IAFMM) ने भारत को क्षेत्रीय संवाद के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। यह बैठक पूरे 10 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित हुई, जिसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इजरायल यात्रा और नेतन्याहू दौरे के बीच सटीक टाइमिंग
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर हाल ही में दिसंबर 2025 में इजरायल का दौरा कर चुके हैं और अब प्रधानमंत्री नेतन्याहू के भारत आगमन की तैयारियां चल रही हैं। कूटनीतिक हलकों में इस टाइमिंग को भारत की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है, जिससे भारत ने इजरायल और अरब देशों — दोनों को यह संदेश दिया कि वह क्षेत्रीय संतुलन साधने की क्षमता रखता है।
फिलिस्तीन ने भारत को बताया संभावित मध्यस्थ
बैठक में शामिल फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने भारत की भूमिका को खुलकर सराहा। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है, जिसके पास इजरायल और अरब देशों — दोनों से संवाद करने की विश्वसनीयता है। फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने और शांति प्रक्रिया में सक्रिय हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
इजरायल के साथ सुरक्षा सहयोग भी बरकरार
भारत-इजरायल संबंधों में भी मजबूती बनी हुई है। जयशंकर की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया। रक्षा सहयोग के तहत ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस से जुड़े विषयों पर बातचीत आगे बढ़ी है, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और गहरा करती है।
अरब देशों के साथ ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी
दूसरी ओर, भारत ने अरब देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर सहयोग को प्राथमिकता दी। 22 अरब देशों की एक साथ मौजूदगी ने यह साफ किया कि भारत मिडिल ईस्ट में केवल सुरक्षा साझेदार नहीं, बल्कि आर्थिक और विकास सहयोगी के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत-अरब बैठक में UAE की अहम भूमिका
इस बैठक की सह-अध्यक्षता संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने की, जो भारत-अरब संबंधों में उसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में अरब देशों को साझेदार बनाकर आगे बढ़ना चाहता है।
IMEC और ग्लोबल साउथ की रणनीति
बैठक में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को लेकर भी चर्चा हुई, जिसे एशिया-यूरोप कनेक्टिविटी का अहम विकल्प माना जा रहा है। इसके साथ ही भारत, BRICS की अध्यक्षता के तहत खुद को ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी सक्रिय है, जहां अरब देशों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत का बढ़ता वैश्विक कद
इजरायल और अरब देशों — दोनों के साथ समानांतर संवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब मिडिल ईस्ट में केवल एक बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि संतुलन साधने वाला प्रभावशाली खिलाड़ी बन चुका है। आने वाले दिनों में नेतन्याहू का भारत दौरा इस कूटनीतिक रणनीति को और मजबूती दे सकता है। साधने वाला प्रभावशाली खिलाड़ी बन चुका है। आने वाले दिनों में नेतन्याहू का भारत दौरा इस कूटनीतिक रणनीति को और मजबूती दे सकता है।