जयपुर में पतंगबाजी ने बदला उत्सव को मातम में
जयपुर में मकर संक्रांति का उत्साह उस समय गम में बदल गया, जब जानलेवा मांझे ने एक 10 वर्षीय बच्चे की जान ले ली। यह हादसा पूरे शहर के लिए शॉकिंग रहा। एसएमएस ट्रॉमा सेंटर में बुधवार देर शाम तक घायल मरीजों की लंबी कतार देखने को मिली।
त्योहारों के दौरान सुरक्षा की अनदेखी अक्सर जानलेवा साबित होती है। यह हादसा हमें त्योहारों में सावधानी बरतने की गंभीर चेतावनी देता है।
10 साल के मासूम की मौत: गला कटने से दम तोड़ा
एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर दिनेश गोरा ने बताया कि बच्चे को गंभीर हालत में लाया गया था। पतंगबाजी के दौरान मांझे से गला कटने के कारण डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका।
यह घटना बताती है कि पतंगबाजी के लिए इस्तेमाल होने वाले मांझे कितने खतरनाक हो सकते हैं, विशेषकर बच्चों के लिए।
हादसों में अब तक 42 लोग घायल, 18 की हालत गंभीर
नोडल अधिकारी डॉ. बीएल यादव के अनुसार, बुधवार शाम तक कुल 42 लोग ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। 18 लोगों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें भर्ती किया गया, जबकि 24 लोग प्राथमिक उपचार के बाद घर लौट गए। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गंभीर मरीजों की देखभाल में जुटी हुई है।
त्योहारों के दौरान अस्पतालों में भीड़ बढ़ने और गंभीर चोटों के मामलों से पता चलता है कि सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
जग महल के किनारे पतंग महोत्सव आयोजित
हर साल की तरह इस साल भी जयपुर में मकर संक्रांति पर जग महल के किनारे पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय और विदेशी पर्यटकों ने भी हिस्सा लिया। सुबह से ही पिंक सिटी में पतंग उड़ाने का उत्साह देखने को मिला।
महोत्सव का आनंद लेते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है। हादसे इस बात की याद दिलाते हैं कि उत्सव और सुरक्षा दोनों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।