जयपुर: भू-माफियाओं के लिए ‘गायब’ हुआ सरकारी रास्ता, तहसीलदार कैमरे के सामने चुप
जयपुर के मौजमाबाद (दूदू) क्षेत्र में बागेत गांव के किसानों ने राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुराने सरकारी रास्ते (खसरा नंबर 525) को रिकॉर्ड से ही मिटा कर भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाया गया।
1. किसानों का आरोप: सरकारी रास्ता गायब
किसानों का कहना है कि खसरा नंबर 525 में स्थित पुराना रास्ता राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड से हटा दिया गया। उनका आरोप है कि भू-माफियाओं को फायदा देने के लिए नया रास्ता गलत तरीके से दर्ज कराया गया। पटवारी लादू सिंह और अन्य उच्च अधिकारियों पर प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुराने रास्ते की तरमीम बदलने का आरोप है।
यह मामला जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार और अधिकारिक मिलीभगत का एक गंभीर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
2. तहसीलदार ने रिपोर्ट क्यों दबाई?
मौजमाबाद एसडीएम ने तहसीलदार सुरेंद्र विश्नोई से इस मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के लिए कई बार आदेश जारी किए। हल्का पटवारी ने अपनी जांच रिपोर्ट तहसीलदार को पहले ही सौंप दी थी, लेकिन अब तक इसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। सवाल उठता है कि आखिर यह रिपोर्ट क्यों दबाई जा रही है।
यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
3. तहसीलदार कैमरे से बचते नजर आए
जब तहसीलदार सुरेंद्र विश्नोई से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से कतराया। उन्होंने कहा, “यह कोई लॉजिकल बात नहीं है, मामला मेरी जानकारी में नहीं है।” इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब ने किसानों का गुस्सा और बढ़ा दिया।
अधिकारियों का ऐसा व्यवहार जनता के विश्वास को कमजोर करता है और भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करता है।
4. एसडीएम ने किया मामला स्पष्ट
मौजमाबाद एसडीएम बलवीर सिंह ने कहा कि मामला कोर्ट में चल रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज पुराने रास्ते को खुर्दबुर्द नहीं किया जा सकता। उन्होंने टीम के साथ मौके पर जाकर जांच का आश्वासन भी दिया।
एसडीएम का बयान यह दर्शाता है कि उच्च प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझ रहा है, लेकिन प्रशासनिक कार्यवाही में देरी से किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।