जादवपुर यूनिवर्सिटी हिजाब विवाद: महिला प्रोफेसर को राहत, ड्यूटी पर लौटने की मिली अनुमति
कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी में सामने आए हिजाब विवाद में शामिल महिला प्रोफेसर को बड़ी राहत मिली है। यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, कार्यकारी परिषद ने प्रोफेसर सरस्वती हल्दर को ड्यूटी जॉइन करने की अनुमति दे दी है। परिषद के फैसले के बाद अब वह जब चाहें या अपनी छुट्टी पूरी होने के बाद काम पर लौट सकती हैं।
क्या है पूरा हिजाब विवाद
यह विवाद 22 दिसंबर को उस समय सामने आया था, जब यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम के दौरान अंग्रेजी विभाग की प्रमुख (HOD) सरस्वती हल्दर ने थर्ड ईयर की एक छात्रा से हिजाब हटाने को कहा था। बताया गया कि यह निर्देश हेडफोन जांच के उद्देश्य से दिया गया था।छात्रा ने इस घटना को भेदभावपूर्ण बताया, जिसके बाद मामला विश्वविद्यालय स्तर से बाहर तक चर्चा का विषय बन गया।
छात्रा के आरोपों से बढ़ा विवाद
छात्रा का कहना था कि उससे सार्वजनिक मंच पर हिजाब हटाने को कहना उसकी धार्मिक पहचान से जुड़ा मामला है और यह उसके साथ असमान व्यवहार है। आरोप सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।शैक्षणिक परिसरों में व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर ऐसे मामले अक्सर संवेदनशील बहस को जन्म देते हैं।
यूनिवर्सिटी ने बनाई थी जांच समिति
विवाद के बाद जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति ने प्रारंभिक स्तर पर यह सुझाव दिया था कि जांच पूरी होने तक सरस्वती हल्दर को ड्यूटी से मुक्त रखा जाए।यह कदम मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था, ताकि किसी भी तरह का दबाव या प्रभाव न पड़े।
29 जनवरी को आ सकती है जांच रिपोर्ट
जांच समिति की रिपोर्ट 29 जनवरी को सौंपे जाने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि घटना के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई या क्लोजर पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कार्यकारी परिषद का अहम फैसला
इस बीच यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद ने जांच समिति की सिफारिश से अलग फैसला लेते हुए सरस्वती हल्दर को ड्यूटी जॉइन करने की अनुमति दे दी है। परिषद ने साफ कहा है कि प्रोफेसर जब चाहें या छुट्टी समाप्त होने के बाद काम पर लौट सकती हैं।कार्यकारी परिषद का यह निर्णय बताता है कि अंतिम अधिकार उसी के पास है और फिलहाल जांच पूरी होने तक कोई प्रशासनिक रोक जरूरी नहीं समझी गई।
जांच जारी, लेकिन प्रोफेसर को राहत
हालांकि जांच प्रक्रिया अब भी जारी है, लेकिन ड्यूटी पर लौटने की अनुमति मिलने से महिला प्रोफेसर को अस्थायी राहत मिली है। मामले पर छात्र संगठनों और शिक्षाविदों की नजर बनी हुई है।यह मामला आने वाले समय में विश्वविद्यालय परिसरों में धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक अधिकारों की बहस को और तेज कर सकता है।