ईरान में विरोध प्रदर्शनों से बढ़ा सियासी संकट, खामेनेई के ‘प्लान-B’ पर उठे सवाल — क्या सच में रूस जाने की तैयारी?
ईरान में आर्थिक बदहाली और महंगाई के बीच भड़के विरोध प्रदर्शनों ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया है। इसी बीच यह दावा सामने आया है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई हालात बिगड़ने पर देश छोड़कर रूस जाने की तैयारी कर सकते हैं। हालांकि सत्ता प्रतिष्ठान इन दावों पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन बढ़ती अशांति ने शासन की चुनौतियों को और गहरा दिया है।
संकट गहराया — विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को ‘सर्वाइवल मोड’ में धकेला
ईरान भर में आर्थिक संकट, गिरती मुद्रा और महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों के प्रदर्शनों ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। कई शहरों में दुकानदार हड़ताल पर चले गए, जबकि विभिन्न स्थानों पर झड़प और आगजनी की घटनाएँ सामने आईं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शन की लहर के दौरान कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ रिपोर्ट की गई हैं।
यह विरोध सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि शासन के प्रति असंतोष की व्यापक अभिव्यक्ति बनता जा रहा है, जो सत्ता ढांचे के लिए गंभीर चुनौती है।
खामेनेई का ‘प्लान-B’? रूस जाने की तैयारी का दावा
एक कथित खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर प्रदर्शन नियंत्रण से बाहर होते हैं या सुरक्षा संस्थान शासन का साथ छोड़ देते हैं, तो खामेनेई अपने करीबी सहयोगियों और परिवार के साथ देश छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित निकासी के लिए विदेशों में सुरक्षित ठिकानों और संपत्तियों की व्यवस्था पहले से चिन्हित बताई जा रही है।
ऐसे दावे राजनीतिक दबाव या सूचनात्मक रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, लेकिन यह निश्चित है कि सत्ता तंत्र के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
करीबी सर्कल के साथ संभावित निकासी की चर्चा
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ‘प्लान-B’ सक्रिय होता है, तो खामेनेई अपने बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा समेत करीब 20 विश्वसनीय सहयोगियों के साथ देश छोड़ सकते हैं।
उत्तराधिकार और शक्ति हस्तांतरण का सवाल इस समय ईरान की राजनीति में अहम है — और इसी बिंदु पर सबसे ज्यादा अटकलें केंद्रित हैं।
स्वास्थ्य व उम्र को लेकर भी उठ रहे सवाल
हाल के तनावपूर्ण हालात और लगातार जारी दबाव के बीच खामेनेई की शारीरिक और मानसिक स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
विश्लेषण:
राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में नेता की सेहत से जुड़ी अटकलें अक्सर सत्ता की स्थिरता पर प्रभाव डालती हैं।
सरकार का रुख — प्रदर्शनकारियों के प्रति ‘संवेदनशीलता’ की अपील
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने गृह मंत्रालय से कहा है कि प्रदर्शनकारियों के साथ संवेदनशील और जिम्मेदाराना रवैया अपनाया जाए। उनका कहना है कि समाज को केवल दमन के जरिए शांत नहीं किया जा सकता।
यह बयान शासन के भीतर नीति-गत असहमति या सतर्क राजनीतिक संदेश का संकेत माना जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव — ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंसा जारी रहने पर प्रदर्शनकारियों की मदद का संकेत दिया, जिसके बाद ईरानी अधिकारियों ने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों के खिलाफ पलटवार की चेतावनी दी।
यह स्थिति घरेलू संकट को अंतरराष्ट्रीय शक्ति-राजनीति में बदल सकती है, जिससे जोखिम और बढ़ जाते हैं।
मौतें और गिरफ्तारियाँ बढ़ीं — मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
लंबे समय में इसका असर नागरिक समाज, राजनीतिक स्थिरता और शासन की अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ सकता है।
ईरान में मौजूदा घटनाक्रम सिर्फ आर्थिक असंतोष का परिणाम नहीं बल्कि एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक संकट का संकेत देता है। खामेनेई के रूस जाने की चर्चाएँ भले ही अपुष्ट हों, लेकिन यह स्पष्ट है कि शासन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाला समय देश की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।