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ईरान का आक्रामक रुख: ‘प्री-एम्प्टिव अटैक’ की चेतावनी से ट्रंप अलर्ट, क्या होर्मुज बन सकता है टकराव का केंद्र?


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने अमेरिका की “हस्तक्षेपकारी बयानबाजी” के जवाब में प्री-एम्प्टिव अटैक की चेतावनी दी है। इसका सीधा संकेत यह है कि ईरान अब रक्षात्मक रणनीति से बाहर निकलकर पहले वार करने की नीति अपनाने की तैयारी में है। इस बयान के बाद वैश्विक सुरक्षा और तेल आपूर्ति पर असर की आशंकाएं तेज हो गई हैं।


🔹 ट्रंप की चेतावनी से भड़का तेहरान

अमेरिका के बयान को ईरान ने बताया सीधी चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस वक्त हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करता है” तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। ईरान ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया। ईरानी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि इस तरह की धमकियां राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा हमला हैं।


🔹 सेना प्रमुख का सख्त संदेश

‘अब जवाब सिर्फ शब्दों में नहीं होगा’

ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने साफ शब्दों में कहा कि देश को निशाना बनाने वाली बयानबाजी का जवाब सैन्य कार्रवाई के रूप में भी दिया जा सकता है। उन्होंने “प्री-एम्प्टिव अटैक” की बात कहकर यह संकेत दिया कि यदि खतरा आसन्न लगा तो ईरान पहले हमला कर सकता है। यह रुख दर्शाता है कि तेहरान अब केवल बचाव तक सीमित नहीं रहना चाहता।


🔹 भीतर भी दबाव में ईरान

विरोध प्रदर्शन और महंगाई ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल

बाहरी दबाव के साथ-साथ ईरान को घरेलू असंतोष का भी सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन से जनता में नाराजगी है। हालात संभालने के लिए सरकार ने चावल, मांस और पास्ता जैसी जरूरी वस्तुओं पर सब्सिडी देना शुरू किया है। दुकानदारों के अनुसार, रियाल की गिरावट और आयात पर मिलने वाली रियायती दरों में बदलाव से खाद्य तेल जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें कई गुना बढ़ सकती हैं, जिससे असंतोष और भड़कने की आशंका है।


🔹 ईरान का बदला हुआ रणनीतिक संकेत

डिफेंस से ऑफेंस की ओर बढ़ता तेहरान

ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित रहने का दौर खत्म हो सकता है। बाहरी धमकियों के जवाब में सैन्य विकल्प खुले रखने की नीति यह दिखाती है कि ईरान अपनी रणनीति में आक्रामकता को शामिल कर रहा है। यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।


❓ प्री-एम्प्टिव अटैक क्या होता है?

खतरे से पहले वार करने की सैन्य नीति

प्री-एम्प्टिव अटैक का अर्थ है—किसी संभावित हमले को रोकने के लिए पहले से की गई सैन्य कार्रवाई। इसे आत्मरक्षा का एक रूप माना जाता है, जिसमें कोई देश दुश्मन की तैयारी को निष्क्रिय करने या उसे कमजोर करने के उद्देश्य से पहले वार करता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह अवधारणा हमेशा विवादित रही है, क्योंकि यह युद्ध को भड़काने का कारण भी बन सकती है।


🔹 होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा

तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है

ईरान की चेतावनी में यह भी संकेत है कि किसी भी सैन्य कदम का प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच सकता है। यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। यदि यहां तनाव बढ़ा या मार्ग बाधित हुआ, तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है।


🌍 होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

दुनिया के तेल व्यापार की धड़कन

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसी रास्ते से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल का परिवहन होता है। ईरान पहले भी चेतावनी देता रहा है कि यदि उस पर हमला हुआ या उसे उकसाया गया तो वह इस मार्ग को बाधित कर सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक बाजारों पर तुरंत पड़ता है।


रणनीतिक धमकी या वास्तविक युद्ध का संकेत?

ईरान की “प्री-एम्प्टिव अटैक” की चेतावनी केवल शब्दों की लड़ाई नहीं, बल्कि बदलती रणनीति का संकेत है। एक ओर अमेरिका और इजरायल का दबाव है, तो दूसरी ओर देश के भीतर आर्थिक संकट और विरोध प्रदर्शन। ऐसे में तेहरान का आक्रामक रुख क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकता है।
हालांकि, यह भी संभव है कि यह बयानबाजी कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो। लेकिन यदि हालात बिगड़े और होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ, तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा—यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है।

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