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13.5 करोड़ का लोन जिस कंपनी से लेने का दावा, वह निकली ‘कागज़ों की कंपनी’

राजनीतिक रणनीति बनाने वाली देश की चर्चित संस्था I-PAC (Indian Political Action Committee) एक और बड़े वित्तीय विवाद में घिर गई है। कंपनी द्वारा दिखाए गए 13.5 करोड़ रुपये के लोन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जांच में सामने आया है कि जिस कंपनी से यह लोन लेने का दावा किया गया, उसका उस समय कानूनी अस्तित्व ही नहीं था


🧾 किस कंपनी से लोन लेने का दावा?

I-PAC ने अपनी बैलेंस शीट और ऑडिट दस्तावेजों में बताया था कि उसे हरियाणा के रोहतक स्थित
रामसेतु इन्फ्रास्ट्रक्टर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 13.5 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है।

  • पता: अशोक प्लाज़ा, तीसरी मंज़िल, दिल्ली-रोहतक रोड
  • यह जानकारी 17 दिसंबर 2021 को ROC में अपलोड की गई थी

🔍 जांच में क्या निकला सामने?

जांच के दौरान जब कंपनी के पते और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, तो बड़ा खुलासा हुआ—

  • बताए गए पते पर ऐसी कोई कंपनी मौजूद नहीं मिली
  • टैक्स और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां
  • शुरुआती संकेत: यह एक शेल कंपनी हो सकती है

🕵️‍♂️ क्या यह कंपनी कभी थी ही नहीं?

ROC रिकॉर्ड के अनुसार इसी नाम से मिलती-जुलती एक कंपनी जरूर दर्ज थी—

  • नाम: रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • पंजीकरण: अक्टूबर 2013
  • स्थिति: 8 अगस्त 2018 को स्ट्राइक-ऑफ

👉 यानी I-PAC द्वारा लोन दिखाने से तीन साल पहले ही यह कंपनी बंद हो चुकी थी


💰 I-PAC का दावा: कुछ रकम लौटाई

I-PAC ने 27 जून 2025 को बयान जारी कर कहा—

  • 13.5 करोड़ में से 1 करोड़ रुपये चुका दिए गए
  • अब भी 12.5 करोड़ रुपये बकाया

लेकिन सवाल यह है कि
👉 जिस कंपनी को पैसे लौटाने का दावा किया गया, वह मौजूद ही नहीं थी!


🚨 अन्य कंपनियों में भी गड़बड़ी के संकेत

सूत्रों के मुताबिक—

  • I-PAC से जुड़ी कई कंपनियों की बैलेंस शीट शून्य (Zero) पाई गई
  • एक से अधिक संस्थाओं में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन
  • ED (प्रवर्तन निदेशालय) लगातार जांच कर रहा है

❓ 13.5 करोड़ के लोन ने खड़े किए बड़े सवाल

  • क्या I-PAC ने जानबूझकर गैर-मौजूद कंपनी से लोन दिखाया?
  • क्या किसी अन्य स्रोत से आए पैसों को वैध दिखाने के लिए शेल कंपनी का इस्तेमाल हुआ?
  • क्या यह मामला राजनीतिक फंडिंग से जुड़ा बड़ा घोटाला बन सकता है?

जांच अभी जारी है, लेकिन अब तक सामने आए तथ्य I-PAC के वित्तीय दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला आने वाले समय में देश का बड़ा राजनीतिक-वित्तीय विवाद बन सकता है।

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