इंट्रो हेडलाइन: SC आरक्षण नीति पर फिर बोले CJI गवई — “SC कोटे में क्रीमी लेयर लागू करना उचित नहीं”
भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ गवई ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वे अनुसूचित जातियों (SC) के आरक्षण में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू करने के पक्षधर नहीं हैं। उनका कहना है कि समाज में गहराई से मौजूद ऐतिहासिक व सामाजिक भेदभाव को देखते हुए SC श्रेणी में आर्थिक आधार की वही कसौटी लागू नहीं की जा सकती, जो अन्य वर्गों पर लागू होती है।
CJI गवई का स्पष्ट रुख: SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की जरूरत नहीं
प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग में आरक्षण की मूल भावना सामाजिक उत्थान और ऐतिहासिक रूप से झेली गई विषमताओं को दूर करना है। ऐसे में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा यहां लागू करना तर्कसंगत नहीं होगा। उनका कहना है कि यह नीति SC समुदाय की वास्तविक समस्याओं और सामाजिक स्थिति को सही तरह नहीं समझती।
IAS अधिकारी के बच्चों और किसान परिवार की तुलना से समझाया मुद्दा
CJI गवई ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक उच्च पदस्थ IAS अधिकारी के बच्चों और एक गरीब किसान के बच्चों की सामाजिक वास्तविकता को समान नहीं माना जा सकता। हालांकि दोनों SC श्रेणी से आते हैं, लेकिन सामाजिक भेदभाव और अवसरों की उपलब्धता के स्तर में अभी भी गहरा अंतर है। इसलिए आरक्षण में दोनों को अलग दृष्टि से देखना आवश्यक है।
राज्यों को दी सलाह: “जमीनी हकीकत समझकर बनाएं नीतियां”
प्रधान न्यायाधीश ने राज्यों को सुझाव दिया कि वे SC समुदाय की सामाजिक संरचना और जमीनी स्तर पर मौजूद समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार करें। उन्होंने कहा कि किसी भी वर्ग की प्रगति का मूल्यांकन केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता और समान अवसरों से किया जाना चाहिए।
SC समुदाय के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं: CJI
गवई ने यह भी कहा कि आरक्षण का अर्थ सिर्फ सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक अवसरों तक सीमित नहीं है। यह संविधान द्वारा दिया गया एक ऐसा साधन है, जिसका उद्देश्य सदियों से चले आ रहे भेदभाव को कम करना और समाज में समानता स्थापित करना है। इसलिए इसकी संरचना बदलने से पहले व्यापक सामाजिक संवाद आवश्यक है।
‘क्रीमी लेयर’ पर बहस को बताया संवेदनशील विषय
उन्होंने कहा कि SC श्रेणी में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग अक्सर आर्थिक बराबरी के आधार पर उठती है, लेकिन इससे सामाजिक पिछड़ेपन की असली तस्वीर नज़रअंदाज़ हो जाती है। उन्होंने साफ कहा कि यह विषय अत्यंत संवेदनशील है और इसे केवल आर्थिक पैमाने पर कसना न्यायसंगत नहीं होगा।
“SC आरक्षण की मूल भावना बरकरार रहनी चाहिए” — CJI गवई
CJI गवई ने दोहराया कि अनुसूचित जाति वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए आरक्षण की मौजूदा संरचना को समझने और उसकी जरूरतों के अनुसार सुरक्षित रखने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक SC कोटे में क्रीमी लेयर लागू करने का विचार अभी न तो व्यावहारिक है और न ही संविधान की भावना के अनुरूप।