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इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम’ पर टकराव: बजट बैठक बनी सियासी अखाड़ा

इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन में ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी पार्षदों के बीच तीखा विवाद सामने आया। बहस के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी, नारेबाजी और हंगामे ने सदन की कार्यवाही को बाधित कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि एक पार्षद को दिनभर के लिए निलंबित करना पड़ा और सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा।

वंदे मातरम पर शुरू हुआ विवाद

इंदौर नगर निगम परिषद की बजट बैठक सामान्य रूप से शुरू हुई, लेकिन ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे पर अचानक माहौल गरमा गया। बीजेपी पार्षदों ने कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम पर राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया। इस आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। सदन में बार-बार टोकाटाकी और आरोप-प्रत्यारोप के चलते कार्यवाही बाधित होती रही। स्थिति धीरे-धीरे इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सामान्य चर्चा की जगह राजनीतिक टकराव ने ले ली।

विवादित बयान से भड़का माहौल

बहस के दौरान रुबीना इकबाल खान द्वारा दिया गया कथित विवादित बयान आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। उनके बयान के बाद बीजेपी पार्षद आक्रोशित हो गए और जोरदार विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते सदन ‘वंदे मातरम’ के नारों से गूंज उठा। इस दौरान कई पार्षद अपनी सीटों से उठकर विरोध जताने लगे, जिससे कार्यवाही पूरी तरह से बाधित हो गई। माहौल इतना उग्र हो गया कि सभापति को स्थिति संभालने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला

विवाद के बीच फौजिया शेख अलीम ने अपने पक्ष में संविधान का हवाला दिया। उनका कहना था कि संविधान नागरिकों को राष्ट्रगान गाने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन राष्ट्रगीत गाने के लिए बाध्य नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके धार्मिक विश्वास के अनुसार वे ‘वंदे मातरम’ नहीं बोल सकतीं। इस बयान के बाद बहस और तीखी हो गई, क्योंकि बीजेपी पार्षदों ने इसे राष्ट्रभावना से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

महापौर और सभापति की सख्ती

मामले को बढ़ता देख महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान करार दिया। वहीं सभापति ने अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाते हुए फौजिया शेख अलीम को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया। इस कार्रवाई के बावजूद हंगामा तुरंत शांत नहीं हुआ और दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी जारी रही। सदन की कार्यवाही कई बार बाधित करनी पड़ी।

‘गद्दार’ टिप्पणी से बढ़ा दूसरा विवाद

‘वंदे मातरम’ विवाद के बीच ही एक और मुद्दा सामने आ गया, जब कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए पार्षदों को ‘गद्दार’ कहे जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी पार्षदों ने इसे व्यक्तिगत हमला बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और सभापति के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की। इस घटनाक्रम ने पहले से गरम माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।

विकास की जगह विवादों में घिरी बैठक

पूरे घटनाक्रम के दौरान बजट और विकास से जुड़े मुद्दे पीछे छूट गए और सदन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच बन गया। बार-बार के हंगामे और नारेबाजी के कारण बैठक का उद्देश्य प्रभावित हुआ। अंततः यह स्पष्ट हो गया कि इंदौर नगर निगम का यह बजट सम्मेलन विकास की बजाय विवादों और सियासी टकराव के लिए ज्यादा चर्चा में रहा।

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