भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत रफ़्तार पर—6.5% ग्रोथ का नया भरोसा, घरेलू मांग ने अमेरिकी टैरिफ का दबाव किया बेअसर….
वैश्विक आर्थिक सुस्ती के माहौल में भी भारत की अर्थव्यवस्था अपनी तेज़ी बरकरार रखे हुए है। ताज़ा आर्थिक आकलनों के अनुसार, देश में बढ़ती घरेलू खपत, कर राहत और नरम होती ब्याज दरों ने विकास की गति को और मजबूत किया है। नई रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP 6.5% की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि अगले साल यह और बढ़कर 6.7% तक जा सकती है। यह संकेत है कि भारत वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच भी स्थिरता और मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
भारत की ग्रोथ पर इंटरनेशनल भरोसा बढ़ा
वैश्विक स्तर पर धीमी होती अर्थव्यवस्था के बीच भारत ग्रोथ का अहम केंद्र बनकर उभर रहा है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एजेंसियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रफ्तार लगातार मज़बूत बनी रहेगी। नवीन आर्थिक अनुमानों के अनुसार, भारत 2025-26 में 6.5% और 2026-27 में 6.7% की विकास दर हासिल कर सकता है।
पांच तिमाहियों में सबसे तेज़ तिमाही ग्रोथ
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में GDP ग्रोथ 7.8% तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे तेज़ वृद्धि है। यह संकेत है कि अर्थव्यवस्था में मांग और उत्पादन दोनों का तालमेल मज़बूत हो रहा है। दूसरी तिमाही के आधिकारिक आंकड़े 28 नवंबर को जारी होंगे।
कर राहत और सस्ती वित्त व्यवस्था ने बढ़ाया उपभोग
विश्लेषकों के अनुसार, कर कटौती और मौद्रिक नीति में ढील ने भारतीय उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को बढ़ाया है। कम टैक्स और कम ब्याज दरों ने घरेलू मांग को नई ऊर्जा दी है, जिसके कारण अर्थव्यवस्था में उपभोग आधारित वृद्धि मजबूत हुई है। इसी कारण आने वाले वर्षों में भी ग्रोथ का बड़ा आधार घरेलू मांग ही रह सकती है।
आयकर और GST में राहत से मध्यम वर्ग को बड़ा फायदा
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर सीमा को 7 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया, जिससे मध्यम वर्ग को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की सीधी राहत मिली है। साथ ही, 375 से अधिक दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर GST दरें घटाई गईं, जिससे खपत बढ़ने में मदद मिली है। यह राहत आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
RBI की सस्ती ब्याज दरें अर्थव्यवस्था के लिए बढ़त का इंजन
केंद्रीय बैंक ने जून में मुख्य नीतिगत दरों में 0.5% की कटौती कर उन्हें तीन साल के निचले स्तर 5.5% पर ला दिया। सस्ती ऋण दरों ने घर, वाहन, उद्योग और MSME सेक्टर में नए निवेश को गति दी है। RBI का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ 6.8% तक रह सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर आंकड़ा है।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद घरेलू मांग कायम
भले ही अमेरिकी आयात शुल्क कुछ भारतीय उत्पादों पर असर डाल रहे हों, लेकिन घरेलू बाजार की मजबूत खपत ने इन बाहरी दबावों को काफी हद तक संतुलित किया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बड़ी उपभोक्ता क्षमता, उद्योगों को वैश्विक उतार-चढ़ाव से बचाती है और विकास को स्थिर रखती है।
भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में कमी के संकेत
व्यापार नीति में नरमी के चलते अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम कर सकता है। इससे निर्यात-आधारित उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार वार्ताओं में बढ़ते समय और संसाधन की मांग से कई सरकारें और कंपनियां उत्पादकता सुधारों से ध्यान हटाती दिख रही हैं।
एशिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था—भारत ने वैश्विक चुनौतियों में भी साबित की अपनी मजबूती
भारत की घरेलू आर्थिक संरचना मजबूत बनी हुई है। उपभोग, कर राहत, नीति सुधार और मजबूत बैंकिंग सिस्टम ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में भी भारत दुनिया की तेज़ी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना रहेगा।