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भारतीय सेना की मेजर स्वाति को UN का शीर्ष सम्मान, दक्षिण सूडान में बदल रहीं शांति की तस्वीर


भारतीय सेना की एक अधिकारी ने वैश्विक मंच पर भारत का परचम लहराया है. बेंगलुरु की रहने वाली मेजर स्वाति सांता कुमार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव का प्रतिष्ठित अवॉर्ड 2025 दिया गया है. यह सम्मान उन्हें शांति अभियानों में लैंगिक समानता को ज़मीनी स्तर पर लागू करने और संघर्षग्रस्त इलाकों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए मिला है. दक्षिण सूडान में तैनाती के दौरान उनके काम को अब दुनिया ने सराहा है.


🔹 कौन हैं मेजर स्वाति सांता कुमार?

मेजर स्वाति सांता कुमार भारतीय सेना की अधिकारी हैं और इस समय दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन UNMISS के साथ तैनात हैं. कठिन और अस्थिर हालात वाले इस क्षेत्र में उन्होंने केवल सुरक्षा अभियानों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग — महिलाओं — को शांति प्रक्रिया से जोड़ने का काम किया.


🔹 महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने क्यों की खास तारीफ?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अवॉर्ड की घोषणा करते हुए मेजर स्वाति की पहल “Equal Partners, Lasting Peace” की विशेष रूप से सराहना की.
यह पहल UNMISS के भीतर लैंगिक रूप से समावेशी सोच को मज़बूत करने के लिए शुरू की गई थी, ताकि शांति स्थापना की प्रक्रिया में महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि बराबर की भागीदार बनाया जा सके.


🔹 कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की जीत

मेजर स्वाति का यह प्रोजेक्ट दुनिया भर के सभी UN मिशनों और एजेंसियों से आए सैकड़ों नामांकनों में से चुना गया.
इसे Gender Category में विजेता घोषित किया गया. चार फाइनलिस्टों के बीच हुई वोटिंग में मेजर स्वाति की पहल को सबसे ज़्यादा समर्थन मिला. इस प्रक्रिया में दुनियाभर के UN कर्मियों ने हिस्सा लिया, जिससे इस सम्मान की अहमियत और बढ़ जाती है.


🔹 ज़मीन पर कैसे बदली हालात की दिशा?

मेजर स्वाति के नेतृत्व में भारतीय एंगेजमेंट टीम को प्रभावी तरीके से तैनात और एकीकृत किया गया. उनकी अगुवाई में कई अहम ऑपरेशंस अंजाम दिए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • लघु और लंबी दूरी की पेट्रोलिंग
  • संयुक्त नदी पेट्रोलिंग
  • दूरदराज़ और संवेदनशील इलाकों में एयर पेट्रोलिंग

इन अभियानों में महिला सहभागिता को प्राथमिकता दी गई, जिससे स्थानीय समुदायों का भरोसा बढ़ा.


🔹 5,000 से अधिक महिलाओं को मिला मंच

UN के अनुसार, इन प्रयासों से दक्षिण सूडान के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और सहयोग का माहौल बना.
करीब 5,000 से अधिक महिलाओं को सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय और सार्थक भागीदारी का अवसर मिला. इससे स्थानीय स्तर पर विश्वास मजबूत हुआ और शांति प्रक्रिया को सामाजिक समर्थन मिला.


🔹 संयुक्त राष्ट्र का आकलन क्या कहता है?

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि मेजर स्वाति और उनकी टीम की प्रतिबद्धता आने वाले शांति मिशनों के लिए एक मजबूत मॉडल पेश करती है.
यह उदाहरण दिखाता है कि लैंगिक समावेशी नेतृत्व कैसे नाजुक और हिंसा-प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और स्थिरता की नींव रख सकता है.


🔹 क्यों अहम है यह सम्मान?

यह अवॉर्ड सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता और संवेदनशील नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी है.
आज जब दुनिया के कई हिस्से संघर्ष और अविश्वास से जूझ रहे हैं, ऐसे में मेजर स्वाति की पहल यह संदेश देती है कि बंदूक के साथ-साथ संवाद, समानता और सहभागिता भी शांति का मजबूत रास्ता बन सकती है.


मेजर स्वाति सांता कुमार का सम्मान यह साबित करता है कि भारतीय सेना के अधिकारी केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करते, बल्कि वैश्विक शांति और मानव मूल्यों को भी नई दिशा देते हैं. दक्षिण सूडान से उठी उनकी पहल अब पूरी दुनिया के शांति अभियानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

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