🌍 भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पुतिन की दोस्ती पर क्यों नहीं पड़ेगा असर?
भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद वैश्विक राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
लेकिन इस समझौते के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इससे भारत और रूस के रिश्तों पर असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने की संभावना बेहद कम है। इसके पीछे कई अहम वजहें हैं।
🔴 1. भारत की रणनीतिक स्वतंत्र नीति
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भारत लंबे समय से संतुलनकारी विदेश नीति अपनाता आया है।
- भारत किसी एक शक्ति गुट का हिस्सा नहीं बनता।
- अमेरिका, रूस, यूरोप और ग्लोबल साउथ सभी के साथ अलग-अलग स्तर पर रिश्ते बनाए रखता है।
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी इसी नीति का हिस्सा है, न कि रूस विरोधी कदम।
🔴 2. यह सैन्य गठबंधन नहीं, केवल आर्थिक समझौता
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भारत-अमेरिका समझौता पूरी तरह व्यापार से जुड़ा हुआ है।
- इसमें टैरिफ कम करना और बाजार पहुंच बढ़ाना शामिल है।
- यूक्रेन युद्ध, NATO विस्तार या रूस की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे इसमें शामिल नहीं हैं।
- इसलिए रूस इसे अपने खिलाफ नहीं मानता।
🔴 3. भारत-रूस रिश्ते बेहद गहरे और बहुस्तरीय
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भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने और मजबूत हैं।
- भारत रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीद चुका है।
- परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में रूस बड़ा साझेदार है।
- पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदता रहा है।
- ये रिश्ते किसी एक ट्रेड डील से कमजोर नहीं होंगे।
🔴 4. रूस के लिए भारत बेहद अहम साझेदार
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यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए।
- ऐसे समय में भारत रूस का बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक साझेदार बना।
- रूस भारत जैसे बड़े बाजार को खोने का जोखिम नहीं उठाएगा।
- इसलिए यह ट्रेड डील दोनों देशों के रिश्तों पर असर नहीं डालेगी।
🔴 5. रूस खुद अपनाता है व्यावहारिक कूटनीति
रूस खुद भी कई देशों के साथ संतुलित रिश्ते रखता है।
- रूस पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों से व्यापार करता है।
- इसलिए वह भारत से यह उम्मीद नहीं करेगा कि वह अमेरिका से दूरी बनाए।
- मॉस्को भारत की संतुलित नीति को समझता है।
भारत की विदेश नीति का आधार संतुलन और राष्ट्रीय हित है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील आर्थिक सहयोग को मजबूत करती है, जबकि भारत-रूस संबंध रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं।
यही वजह है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता पुतिन और भारत की दोस्ती पर कोई बड़ा असर नहीं डालेगा।