🌍 भारत‑अमेरिका टैरिफ डील: एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रियाएँ और क्या बदलेगा
सोमवार रात भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक टैरिफ डील का ऐलान हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया। साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25% दंडात्मक शुल्क भी हटाया गया।
यह कदम प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की बातचीत के तुरंत बाद लागू हुआ। विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में नया और सकारात्मक मोड़ मान रहे हैं।
🔹 एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रिया
1️⃣ मार्क लिंस्कॉट (पूर्व US ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव)
- कहते हैं: “वाह! यह आखिरकार आ ही गया।”
- महीनों से अटकी वार्ता को शीर्ष नेतृत्व की सीधी बातचीत से अंतिम रूप मिला।
- यह डील भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के लिए फायदेमंद साझेदारी को दर्शाती है।
2️⃣ माइकल कुगेलमैन (साउथ एशिया विशेषज्ञ)
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा ने डील को सकारात्मक दिशा दी।
- यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करेगा और लंबित QUAD समिट के रास्ते खोल सकता है।
- भविष्य में ट्रंप भारत की यात्रा कर सकते हैं और इसे उपलब्धि के रूप में पेश कर सकते हैं।
3️⃣ माइकल रुबिन (अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट)
- टैरिफ का प्रभावी स्तर अब 18% ही रहेगा।
- सुझाव: यदि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ घटा रहा है, तो अमेरिका को समान नीति अपनानी चाहिए।
- कुल मिलाकर डील को पॉजिटिव और निर्यातकों के लिए राहत देने वाला बताया।
🔹 डील का महत्व
- अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को स्पष्ट प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली।
- चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे एशियाई प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अब भारत का लाभ बढ़ गया।
- रूसी तेल पर हटाए गए दंडात्मक शुल्क से ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार अनिश्चितता कम हुई।
- यह कदम भारत‑अमेरिका रिश्तों में नए आर्थिक और रणनीतिक अध्याय की शुरुआत करता है।
यह डील केवल टैरिफ कम करने का मामला नहीं है। यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम है। भारतीय निर्यातकों और अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।