होर्मुज संकट में भारत बना श्रीलंका का सहारा, ईंधन सप्लाई से दी बड़ी राहत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसका सीधा असर श्रीलंका पर पड़ा। गहराते ईंधन संकट के बीच भारत ने आगे बढ़कर आपातकालीन सहायता दी और हजारों टन पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई कर हालात संभालने में अहम भूमिका निभाई। इस कदम की श्रीलंका में व्यापक सराहना हो रही है।
होर्मुज संकट से बिगड़ी वैश्विक सप्लाई चेन
पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। यह जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग माना जाता है। इसके प्रभावित होने से कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा। जहाजों की कमी, बीमा जोखिम और बढ़ते तनाव के कारण कई सप्लायर्स ने आपूर्ति रोक दी। इसका असर खासतौर पर उन देशों पर पड़ा जो पूरी तरह आयातित ईंधन पर निर्भर हैं, जिनमें श्रीलंका प्रमुख रूप से शामिल है।
श्रीलंका में गहराया ईंधन संकट
ईंधन आपूर्ति बाधित होने से श्रीलंका में हालात तेजी से बिगड़ गए। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 25% तक बढ़ोतरी करनी पड़ी, जिससे आम जनता पर भारी असर पड़ा। पेट्रोल की कीमत लगभग 398 रुपये प्रति लीटर और डीजल 382 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया। हालात इतने गंभीर हो गए कि सरकार को चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करना पड़ा और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना पड़ा। परिवहन, उद्योग और दैनिक जीवन पर इस संकट का व्यापक असर देखने को मिला।
भारत ने दिखाई तत्परता, भेजी आपातकालीन मदद
इस मुश्किल समय में भारत ने तेजी से कदम उठाते हुए श्रीलंका को राहत पहुंचाई। भारत ने कुल 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद भेजे, जिसमें 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है। यह आपूर्ति ऐसे समय में की गई जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बाधित थी। भारतीय तेल कंपनियों के माध्यम से यह मदद सुनिश्चित की गई, जिससे श्रीलंका को तत्काल राहत मिली और ईंधन की उपलब्धता में सुधार हुआ।
राजनयिक स्तर पर भी सक्रिय रहा भारत
ऊर्जा सहयोग को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच उच्च स्तर पर लगातार बातचीत भी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार डिसानायके के बीच फोन पर चर्चा हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर बात हुई। इसके अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी संवाद हुआ। यह दर्शाता है कि भारत ने न केवल मानवीय आधार पर बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई।
श्रीलंका में भारत के समर्थन की सराहना
भारत की इस मदद को श्रीलंका में व्यापक सराहना मिली है। विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदासा ने सार्वजनिक रूप से भारत का धन्यवाद करते हुए कहा कि सच्चे रिश्तों की पहचान संकट के समय होती है। भारत ने जिस तत्परता से मदद की, उसने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया है। आम लोगों के बीच भी भारत के इस कदम को सकारात्मक नजरिए से देखा जा रहा है।
चीन की निष्क्रियता पर उठे सवाल
इस संकट के दौरान चीन की ओर से किसी ठोस मदद के सामने न आने से चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में श्रीलंका और चीन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश समझौते हुए थे, लेकिन मौजूदा संकट में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चीन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति ने क्षेत्रीय सहयोग और भरोसे के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
क्षेत्रीय नेतृत्व में भारत की मजबूत भूमिका
पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट किया है कि भारत संकट के समय अपने पड़ोसी देशों के लिए भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है। मानवीय सहायता, त्वरित निर्णय और प्रभावी कूटनीति के जरिए भारत ने क्षेत्र में अपनी साख मजबूत की है। श्रीलंका को दी गई यह मदद न केवल तत्काल राहत है, बल्कि भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।