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भारत-इजरायल रिश्तों में बड़ा अपग्रेड: ‘विशेष रणनीतिक साझेदार’ बनने की तैयारी, FTA से खुलेंगे नए आर्थिक रास्ते


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया Israel यात्रा ने भारत-इजरायल संबंधों को नई दिशा दे दी है। दोनों देश अब पारंपरिक दोस्ती से आगे बढ़कर “विशेष रणनीतिक साझेदारी” की ओर बढ़ रहे हैं। रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था में गहरा सहयोग तथा साल के अंत तक संभावित Free Trade Agreement (FTA) इस रिश्ते को व्यावहारिक परिणामों के दौर में ले जा सकता है।


🔹 नई रणनीतिक श्रेणी में भारत की एंट्री

इजरायल भारत को “स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनर” का दर्जा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अभी यह स्तर सीमित देशों—जैसे United States, Germany, Greece और Cyprus—को ही मिला हुआ है।

इस अपग्रेड का मतलब केवल कूटनीतिक सम्मान नहीं बल्कि तेज़ निर्णय प्रक्रिया, सुरक्षा सहयोग में भरोसा और संयुक्त परियोजनाओं का तेज़ क्रियान्वयन होगा।


🔹 ‘विजन से डिलीवरी’ चरण में पहुंचा रिश्ता

इजरायल के वित्त मंत्रालय के मुख्य अर्थशास्त्री श्मूएल अब्रैमजोन के अनुसार 2017 की ऐतिहासिक भारत-इजरायल पहल ने दिशा तय की थी, जबकि अब दोनों देश वास्तविक परिणामों पर फोकस कर रहे हैं।

यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में घोषणाओं की जगह संयुक्त निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक साझेदारी दिखेगी।


🔹 AI और हाई-टेक सेक्टर में बड़ा गेमचेंजर सहयोग

इजरायल की इनोवेशन क्षमता और भारत की विशाल बाजार एवं उत्पादन शक्ति मिलकर AI, सेमीकंडक्टर, एग्रीटेक और वॉटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं बना सकती है।

विश्लेषण:
भारत को उन्नत तकनीक मिलेगी जबकि इजरायल को बड़े पैमाने पर उत्पादन और वैश्विक बाजार तक पहुंच—दोनों के लिए ‘विन-विन’ मॉडल।


🔹 रक्षा सहयोग बनेगा साझेदारी की रीढ़

भारत और इजरायल पहले से रक्षा सहयोग में मजबूत साझेदार रहे हैं। नई रणनीतिक श्रेणी मिलने पर संयुक्त रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और सुरक्षा नवाचार तेज़ होने की संभावना है।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन बढ़ाने में यह साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


🔹 भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मिलेगा वैश्विक बूस्ट

इजरायल अपनी हाई-टेक विशेषज्ञता को भारत की विनिर्माण क्षमता से जोड़ना चाहता है। इससे संयुक्त रूप से वैश्विक सप्लाई चेन में नई हिस्सेदारी बन सकती है।

भारत धीरे-धीरे केवल बाजार नहीं, बल्कि हाई-टेक उत्पादन केंद्र के रूप में उभर सकता है।


🔹 फिनटेक और डिजिटल इकोनॉमी में नई साझेदारी

इजरायल भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली और फिनटेक इकोसिस्टम—विशेषकर UPI मॉडल—से जुड़ने में गहरी रुचि दिखा रहा है।

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना अब वैश्विक साझेदारी का आधार बनती दिख रही है।


🔹 FTA से व्यापारिक रिश्तों में आएगा बड़ा बदलाव

दोनों देश Free Trade Agreement (FTA) को लेकर तेजी से बातचीत कर रहे हैं और वर्ष के अंत तक समझौते की संभावना जताई जा रही है।

FTA के संभावित फायदे:

  • व्यापार शुल्क में कमी
  • स्टार्टअप और टेक कंपनियों को नए अवसर
  • निवेश प्रवाह में तेजी
  • कृषि और तकनीकी निर्यात में वृद्धि

FTA लागू होने पर भारत-इजरायल व्यापार कई गुना बढ़ सकता है और स्टार्टअप सहयोग भी मजबूत होगा।


🔹 दोस्ती से आगे रणनीतिक गठजोड़ की ओर

यह साझेदारी अब केवल राजनीतिक मित्रता नहीं बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक और तकनीकी रणनीति का हिस्सा बनती दिख रही है। इजरायल भारत को भविष्य की वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहा है।

भारत की वैश्विक भूमिका—इंडो-पैसिफिक, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा संतुलन—में तेजी से विस्तार का संकेत।

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