🇮🇳🤝🇪🇺 ‘भारत के बिना नहीं चलेगा यूरोप का काम’
EU-India Summit में इन 3 बड़ी डील्स पर लगेगी मुहर
यूरोपीय संघ (EU) ने भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर खुलकर बड़ा बयान दिया है। विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के लिए EU की उच्च प्रतिनिधि कॉया कॉलस ने कहा है कि भारत अब यूरोप के आर्थिक लचीलेपन के लिए अपरिहार्य बनता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में 27 जनवरी को नई दिल्ली में होने जा रहे 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में तीन अहम समझौतों पर मुहर लगने की उम्मीद है।
🌍 EU का शीर्ष नेतृत्व भारत क्यों आ रहा है?
यूरोपीय संघ का शीर्ष नेतृत्व
- गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होगा
- इसके बाद EU-India Summit में हिस्सा लेगा
कॉया कॉलस ने यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात—
- युद्ध
- जबरदस्ती
- आर्थिक विखंडन
ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर दबाव में डाल दिया है। ऐसे समय में भारत और यूरोप जैसे दो बड़े लोकतंत्रों का साथ आना जरूरी है।
🧭 2030 तक की दिशा तय करेगा नया रणनीतिक एजेंडा
16वें शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस होगा—
नया EU-India Strategic Agenda, जो 2030 तक दोनों पक्षों की साझेदारी की दिशा तय करेगा।
कॉया कॉलस के मुताबिक,
“यह सिर्फ बयानबाज़ी नहीं होगी, बल्कि रिश्तों को शब्दों से आगे ले जाकर ठोस नतीजों में बदलने का प्रयास होगा।”
📌 Summit में किन 3 बड़ी डील्स पर लगेगी मुहर?
1️⃣ EU-India Free Trade Agreement (FTA)
सबसे अहम एजेंडा है लंबे समय से अटके EU-India मुक्त व्यापार समझौते को पूरा करना।
इस डील से—
- बाज़ार खुलेंगे
- टैरिफ बाधाएं कम होंगी
- क्लीन टेक्नोलॉजी
- फार्मास्यूटिकल्स
- सेमीकंडक्टर्स
जैसे सेक्टर्स में सप्लाई चेन मज़बूत होगी।
2️⃣ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी
EU और भारत एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर करने जा रहे हैं।
इसके तहत सहयोग बढ़ेगा—
- समुद्री सुरक्षा
- आतंकवाद-रोधी कार्रवाई
- साइबर डिफेंस
साथ ही सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत भी शुरू होगी।
कॉया कॉलस ने कहा—
“आज की ज्यादा खतरनाक दुनिया में, साथ काम करना हम दोनों के हित में है।”
3️⃣ मोबिलिटी और लोगों से लोगों का संपर्क
तीसरी बड़ी पहल होगी—
EU-India Mobility Framework
इससे फायदा मिलेगा—
- छात्रों
- रिसर्चर्स
- मौसमी श्रमिकों
- हाई-स्किल प्रोफेशनल्स
की आवाजाही को आसान बनाने में।
इसके साथ-साथ रिसर्च और इनोवेशन में सहयोग भी बढ़ेगा, जिसे दोनों पक्ष भविष्य की प्रतिस्पर्धा की कुंजी मानते हैं।
🔎 क्यों भारत EU के लिए “अपरिहार्य”?
EU के मुताबिक—
- भारत तेज़ी से उभरती आर्थिक शक्ति है
- ग्लोबल सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा रहा है
- टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन में मजबूत पकड़ है
यही वजह है कि यूरोप अब भारत को केवल साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत के रूप में देख रहा है।
EU-India Summit केवल कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि
व्यापार, सुरक्षा और भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को आकार देने वाला मंच बनने जा रहा है।
कॉया कॉलस का बयान साफ संकेत देता है—
भारत के बिना यूरोप की आर्थिक और रणनीतिक सोच अधूरी है।