जयपुर में कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी की पहल से ‘रास्ता खोलो अभियान’ बना मिसाल, 17 महीनों में 1800+ रास्ते खुले
जयपुर जिले में प्रशासन द्वारा चलाया गया ‘रास्ता खोलो अभियान’ अब ग्रामीण विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। इस पहल के जरिए वर्षों से बंद पड़े रास्तों को खोलकर लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया गया है। विवादों के समाधान के साथ-साथ इस अभियान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को भी मजबूत किया है।
प्रशासनिक पहल से बदली ग्रामीण तस्वीर
‘रास्ता खोलो अभियान’ ने यह साबित किया है कि संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण से जमीनी स्तर पर बड़ा बदलाव संभव है। वर्षों से लंबित रास्तों के विवादों को सुलझाकर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई गई है। यह अभियान केवल रास्ते खोलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने गांवों की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। लसाड़िया पंचायत जैसे उदाहरण बताते हैं कि जब प्रशासन और आमजन के बीच संवाद स्थापित होता है, तो जटिल समस्याओं का समाधान भी सहजता से निकल सकता है।
30 साल पुरानी समस्या का समाधान, दूरी हुई आधी
लसाड़िया पंचायत में गडूड़ा से चकवाड़ा तक जाने वाला मार्ग करीब तीन दशकों से बंद था। इस कारण ग्रामीणों को 17 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। अभियान के तहत रास्ता खुलने के बाद यह दूरी घटकर केवल 7 किलोमीटर रह गई है। साथ ही ग्रेवल सड़क के निर्माण से आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुगम हो गई है। इस बदलाव ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या को भी सरल और सुविधाजनक बना दिया है।
खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला बल
रास्ते खुलने का सीधा असर ग्रामीण जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ा है। किसान अब अपनी उपज आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में सुधार हुआ है। बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना आसान हो गया है, जिससे शिक्षा में निरंतरता बनी है। वहीं आपात स्थिति में चिकित्सा सेवाओं तक तेजी से पहुंच संभव हो सकी है। इस प्रकार यह अभियान ग्रामीण जीवन की बुनियादी जरूरतों को मजबूत करने में बेहद प्रभावी साबित हुआ है।
17 महीनों में 1800 से अधिक रास्ते, तय लक्ष्य से आगे बढ़ता अभियान
15 नवंबर 2024 से 29 मार्च 2026 के बीच इस अभियान के तहत 1,802 रास्तों को खोला जा चुका है। यह आंकड़ा प्रशासन की सक्रियता और निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के नेतृत्व में इस अभियान को गति मिली है। उनका कहना है कि “यह केवल रास्ते खोलने का कार्य नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सुविधा और विश्वास बहाल करने का प्रयास है।” प्रशासन ने हर सप्ताह कम से कम तीन रास्ते खोलने का लक्ष्य निर्धारित कर इसे सतत अभियान के रूप में जारी रखा है।
फागी तहसील सबसे आगे, कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन
अभियान के तहत फागी तहसील ने 154 रास्ते खोलकर पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा मौजमाबाद (135), चौमूं (109), शाहपुरा (106), चाकसू (100), फुलेरा (99), आमेर (94), बस्सी (85), सांगानेर (39) और जयपुर तहसील (5) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पूरे जिले में समान रूप से प्रयास किए गए हैं, जिससे अधिकतम ग्रामीणों को लाभ मिल सका है।
संवाद और सहमति से सुलझे वर्षों पुराने विवाद
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका मानवीय दृष्टिकोण रहा है। प्रशासन ने बलपूर्वक कार्रवाई के बजाय संवाद, सहमति और समझाइश का रास्ता अपनाया। इससे दशकों पुराने विवाद भी शांति से सुलझ गए। ग्रामीणों की भागीदारी और विश्वास ने इस पहल को सफल बनाया। यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है कि किस प्रकार संवेदनशीलता के साथ प्रशासनिक कार्यवाही की जाए।
ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी को मिली नई दिशा
‘रास्ता खोलो अभियान’ ने केवल रास्तों को ही नहीं, बल्कि विकास के नए रास्ते भी खोले हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है। प्रशासन का यह प्रयास दिखाता है कि सही योजना और इच्छाशक्ति से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है।