🔴 IAS Award Controversy: AI फोटो विवाद पर खंडवा प्रशासन का बड़ा फैक्ट-चेक, 1.29 लाख असली तस्वीरों से मिला राष्ट्रीय सम्मान
सोशल मीडिया आरोपों के बीच खंडवा जल पुरस्कार पर उठा विवाद
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को मिले 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप लगाए गए कि अवॉर्ड के लिए AI से बनी फर्जी तस्वीरें और गलत आंकड़े अपलोड किए गए। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक और फेक न्यूज बताया है।
IAS ऋषव गुप्ता और डॉ. नागार्जुन गौड़ा को मिला राष्ट्रीय सम्मान
18 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खंडवा कलेक्टर IAS ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत CEO IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसी के बाद सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हुआ।
1.29 लाख तस्वीरों के सत्यापन के बाद मिला पुरस्कार
खंडवा जिला प्रशासन के अनुसार ‘जल संचय, जनभागीदारी (JSJB 1.0)’ अभियान के तहत जिले द्वारा कुल 1,29,046 जल संरक्षण कार्यों की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड की गई थीं। इन सभी तस्वीरों का केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा डेस्क सत्यापन और 1% कार्यों का रैंडम फील्ड वेरिफिकेशन किया गया था।
JSJB और ‘कैच द रेन’ पोर्टल को लेकर फैली गलतफहमी
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि JSJB (जल संचय, जनभागीदारी) और CTR (Catch The Rain) दो अलग-अलग पोर्टल हैं। JSJB पोर्टल पर ही अवॉर्ड से संबंधित तस्वीरें अपलोड की जाती हैं, जबकि CTR पोर्टल केवल जागरूकता और IEC सामग्री के लिए है।
CTR पोर्टल पर 20 AI तस्वीरें, JSJB अवॉर्ड से कोई संबंध नहीं
जिला प्रशासन ने माना कि CTR पोर्टल पर लगभग 20 AI जनित तस्वीरें अपलोड की गई थीं। यह कार्य संभवतः दुर्भावनापूर्ण इरादों से किया गया। इन तस्वीरों का JSJB पुरस्कार चयन प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। AI फोटो अपलोड करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
खंडवा को क्यों मिला 2 करोड़ रुपए का पुरस्कार
भारत सरकार के ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत खंडवा जिले ने जल संरक्षण कार्यों में देश में पहला स्थान हासिल किया। इसी उपलब्धि के लिए जिले को 2 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।
कावेश्वर पंचायत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार में खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर को ‘सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत’ श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला। पंचायत को 1.5 लाख रुपए नकद और ट्रॉफी दी गई। प्रशासन के अनुसार पंचायत में किए गए जल संरक्षण कार्य राष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे।
किन कार्यों के आधार पर हुआ मूल्यांकन
JSJB 1.0 अभियान के तहत खंडवा जिले में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट, डगवेल रिचार्ज, चेकडैम मरम्मत, परकोलेशन पोंड, कंटूर ट्रेंच और गेबियन स्ट्रक्चर जैसे हजारों जल संरक्षण कार्य किए गए।
विवादित पंचायतों पर प्रशासन का स्पष्ट जवाब
शाहपुरा माल, पलानीमाल, डोडखेड़ा और हरवंशपुरा पंचायतों को लेकर वायरल दावों पर प्रशासन ने कहा कि ये शिकायतें जनसुनवाई में पहले ही जांची जा चुकी थीं और इनका JSJB पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है।
शाहपुरा माल पंचायत पर लगे आरोप निराधार
प्रशासन ने बताया कि शाहपुरा माल पंचायत में 150 डगवेल निर्माण का दावा गलत है। मनरेगा के तहत केवल 61 डगवेल रिचार्ज कार्य स्वीकृत हैं। जांच के बाद ग्राम रोजगार सहायक को पहले ही हटाया जा चुका है।
पलानीमाल और डोडखेड़ा मामलों की स्थिति
पलानीमाल पंचायत में 2008 में बने स्टॉपडैम की मरम्मत की गई थी, नया निर्माण नहीं। वहीं डोडखेड़ा में खेत तालाब का निर्माण मौके पर किया गया और मजदूरी भुगतान सीधे हितग्राहियों के खातों में हुआ।
ओंकारेश्वर फोटो विवाद पर भी आया स्पष्टीकरण
ओंकारेश्वर क्षेत्र में सरकारी कर्मचारियों द्वारा फोटो अपलोड किए जाने के आरोपों पर प्रशासन ने कहा कि JSJB अभियान 31 मई 2025 को समाप्त हो चुका था। इसके बाद फोटो अपलोड करना संभव ही नहीं है। ये तस्वीरें ‘कैच द रेन’ अभियान से जुड़ी थीं।
प्रशासन का दावा: भ्रामक खबरों से छवि धूमिल करने की कोशिश
खंडवा जिला प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोप तथ्यहीन, भ्रामक और पूर्व में निपटाई जा चुकी शिकायतों पर आधारित हैं। इनका राष्ट्रीय जल पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है।
यह मामला प्रशासनिक उपलब्धि बनाम सोशल मीडिया आरोपों का उदाहरण बनकर सामने आया है। जांच और केंद्रीय सत्यापन के बावजूद AI फोटो विवाद ने दिखा दिया कि अलग-अलग सरकारी पोर्टल्स की जानकारी के अभाव में भ्रम कैसे फैलता है। प्रशासन की सफाई के बाद अब निगाह इस पर है कि AI फोटो अपलोड करने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।