मानव-वन्यजीव संघर्ष में मौत पर मुआवजा होगा दोगुना, 10 लाख देने के लिए नियमों में संशोधन
राजस्थान में मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। अब ऐसी घटनाओं में जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को मिलने वाली सहायता राशि दोगुनी कर दी जाएगी। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने विधानसभा में बताया कि इसके लिए नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
🟥 5 लाख से बढ़कर 10 लाख होगा मुआवजा
विधानसभा में जानकारी देते हुए मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि वर्ष 2022 में जारी आदेश के अनुसार मानव और वन्यजीव संघर्ष में मृत्यु होने पर मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए इस राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है।
🟦 नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू
मंत्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि सहायता राशि बढ़ाने के लिए विभागीय नियमों में आवश्यक संशोधन किया जा रहा है। संशोधन पूरा होने के बाद राज्य सरकार द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
🟥 करौली बाघ अभयारण्य पर सरकार का स्पष्ट रुख
सदन में मंत्री ने करौली बाघ अभयारण्य से जुड़े मुद्दों पर भी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले किसी भी गांव के निवासियों को उनकी सहमति के बिना विस्थापित नहीं किया जाएगा। सरकार इस मामले में पूरी तरह से संवेदनशील और पारदर्शी नीति अपना रही है।
🟦 बंजर भूमि पर खेती पर मुआवजे का प्रावधान नहीं
मंत्री संजय शर्मा ने यह भी बताया कि यदि अभयारण्य क्षेत्र की बंजर भूमि पर कोई ग्रामीण खेती कर रहा है, तो वर्तमान विभागीय नियमों के तहत इसके लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।
🟥 CTH निर्धारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर
प्रश्नकाल के दौरान विधायक जसवंत सिंह गुर्जर के पूरक प्रश्नों के जवाब में मंत्री ने बताया कि धौलपुर-करौली क्षेत्र में ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट’ (CTH) का निर्धारण उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था।
🟦 अभी शुरू नहीं हुई स्वैच्छिक विस्थापन प्रक्रिया
मंत्री शर्मा ने अपने लिखित जवाब में बताया कि वर्तमान में धौलपुर-करौली क्षेत्र में CTH के अंतर्गत आने वाले गांवों के लिए स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
🟥 भविष्य में विस्थापन हुआ तो मिलेगा नियमानुसार मुआवजा
उन्होंने कहा कि बाड़ी विधानसभा क्षेत्र सहित यदि भविष्य में CTH क्षेत्र में आने वाले गांवों का स्वैच्छिक विस्थापन किया जाता है, तो इसके लिए 2 नवंबर 2002, 21 फरवरी 2008 और 24 जुलाई 2025 को जारी राज्य सरकार एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
मानव और वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा राशि बढ़ाने का फैसला राज्य सरकार की संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। यह कदम न सिर्फ पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल देगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन बनाने में भी मददगार साबित हो सकता है।