हाईकोर्ट का सख्त रुख, केंद्र से मांगा जवाब
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की नागरिकता को लेकर दाखिल याचिका पर Allahabad High Court की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस मामले में औपचारिक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और 6 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार के पास उपलब्ध सभी आधिकारिक रिकॉर्ड सामने लाना जरूरी है। इस आदेश के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
बंद लिफाफे में पेश दस्तावेज, बढ़ी गंभीरता
सुनवाई के दौरान Ministry of Home Affairs की ओर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे गए। जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने इन कागजातों का अवलोकन करने के बाद माना कि मामले में केंद्र की भूमिका बेहद अहम है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार के पास नागरिकता से जुड़े ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिससे साफ है कि यह मामला अब महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवेदनशील कानूनी मुद्दा बन चुका है।
दोहरी नागरिकता विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा विवाद कर्नाटक के एक याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि राहुल गांधी के पास भारतीय नागरिकता के साथ-साथ ब्रिटेन की नागरिकता भी हो सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ दस्तावेज इस बात की ओर इशारा करते हैं कि उन्होंने विदेशी नागरिकता ली थी। इसी आधार पर अदालत से मामले की जांच कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। इस दावे ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और अब यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में है।
निचली अदालत से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
शुरुआत में यह विवाद निचली अदालत में उठाया गया था, जहां याचिकाकर्ता ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। बाद में यह मामला रायबरेली से स्थानांतरित होकर लखनऊ बेंच में पहुंचा। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सुनवाई अधिक व्यवस्थित और गहन तरीके से हो रही है। याचिका में पासपोर्ट कानून सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत अब यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या आगे जांच की आवश्यकता बनती है।
6 अप्रैल की तारीख बनी अहम मोड़
अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जो बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी दिन केंद्र सरकार अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल करेगी, जिसमें नागरिकता से जुड़े दस्तावेज और तथ्य शामिल होंगे। यह साफ होगा कि आरोपों में दम है या वे केवल राजनीतिक आरोप हैं। फिलहाल, इस मामले ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।