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हाईकोर्ट का सख्त रुख : डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में आरोपियों की जमानत खारिज…

जयपुर हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की गई साढ़े सात करोड़ की ठगी के आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला फरवरी 2024 में झुंझुनू साइबर थाने में दर्ज हुआ था। अदालत ने माना कि इस तरह के संगठित साइबर अपराध समाज में भय और असुरक्षा पैदा कर रहे हैं, इसलिए आरोपियों को रिहा नहीं किया जा सकता।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी

झुंझुनू जिले में दर्ज इस मामले में आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने खुद को फर्जी एजेंसी और साइबर जांच अधिकारी बताकर पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। आरोपियों ने लोगों को डराकर उनके बैंक खातों से करीब साढ़े सात करोड़ रुपये ठग लिए। साइबर ठगों ने वीडियो कॉल और नकली आईडी के जरिए पीड़ितों को विश्वास में लेकर यह बड़ी वारदात अंजाम दिया ।

हाईकोर्ट ने माना—“संगठित साइबर अपराध का हिस्सा”

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपी किसी संगठित साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा हैं, जो देशभर में सक्रिय है। जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि ऐसे अपराधों से आम नागरिकों की निजता और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है। इसलिए आरोपियों की रिहाई जांच को प्रभावित कर सकती है।

पुलिस जांच में उजागर हुए कई बैंक खातों के लिंक

जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के माध्यम से विभिन्न राज्यों में भेजी गई। पुलिस ने अब तक कई संदिग्ध खातों को फ्रीज किया है और आरोपियों से पूछताछ में अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। झुंझुनू साइबर पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के अंतरराज्यीय कनेक्शन भी सामने आ सकते हैं।

साइबर अपराध पर बढ़ी सख्ती, अदालत का संकेत

हाईकोर्ट के इस फैसले को साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आम जनता को डिजिटल माध्यमों में किसी भी धमकी या संदिग्ध कॉल से सतर्क रहना चाहिए और ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए।

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