देओल परिवार में अनबन की अटकलों पर हेमा मालिनी का जवाब: “हम बिल्कुल ठीक हैं, एक-दूसरे के बेहद करीब हैं”
दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार के दो अलग-अलग प्रेयर मीट्स को लेकर सोशल मीडिया और फैंस के बीच रिश्तों में दूरी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब इन अटकलों पर खुद हेमा मालिनी ने साफ शब्दों में कहा है कि परिवार के भीतर सब कुछ सामान्य और सौहार्दपूर्ण है।
🕊️ क्यों उठीं अनबन की चर्चाएं?
धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर से उनके बेटे हैं—सनी देओल और बॉबी देओल। वहीं दूसरी शादी हेमा मालिनी से हुई, जिनसे उनकी बेटियां ईशा और अहाना हैं।
निधन के कुछ दिनों बाद मुंबई में देओल परिवार की ओर से एक प्रेयर मीट आयोजित की गई, जिसमें हेमा मालिनी और उनकी बेटियां शामिल नहीं हुईं। उसी दिन हेमा मालिनी ने अपने निवास पर गीता पाठ करवाया। इसके बाद दिल्ली में उन्होंने एक अलग प्रेयर मीट रखी। इन अलग-अलग कार्यक्रमों ने रिश्तों में खटास की अटकलों को हवा दी।
🗣️ हेमा मालिनी का बयान: “लोगों को गॉसिप चाहिए”
इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए हेमा मालिनी ने कहा कि परिवार के बीच हमेशा से रिश्ते अच्छे रहे हैं और आज भी वैसे ही हैं। उनके मुताबिक, लोगों को बेवजह अफवाहें गढ़ने की आदत है और वह अपनी निजी जिंदगी पर सफाई देने को जरूरी नहीं समझतीं।
उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों के दुख को सनसनीखेज खबरों में बदलना दुखद है, इसलिए वह ऐसी अटकलों पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देतीं।
📍 अलग-अलग प्रेयर मीट्स की वजह क्या थी?
एक अन्य इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने स्पष्ट किया कि:
- मुंबई में देओल परिवार ने अपने समूह के लिए प्रेयर मीट रखी।
- उन्होंने अपने घर पर अपने करीबियों के लिए अलग से आयोजन किया।
- दिल्ली और मथुरा में प्रेयर मीट इसलिए रखी गई क्योंकि वह राजनीति से जुड़ी हैं और वहां उनके समर्थकों व सहयोगियों के लिए श्रद्धांजलि सभा करना जरूरी था।
उनका कहना है कि उन्होंने जो किया, वह परिस्थितियों के अनुरूप और पूरी तरह संतोषजनक था।
⭐ प्रेयर मीट्स में कौन-कौन शामिल हुआ?
- मुंबई की प्रेयर मीट में कई फिल्मी सितारे मौजूद रहे।
- दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय मंत्री, सांसदों और फिल्म जगत की हस्तियों ने शिरकत की। इस दौरान हेमा मालिनी दिवंगत अभिनेता के साथ बिताए पलों को याद करते हुए भावुक भी हुईं।
देओल परिवार में मनमुटाव की खबरों पर हेमा मालिनी का स्पष्ट संदेश यही है कि रिश्तों में कोई दूरी नहीं है। अलग-अलग प्रेयर मीट्स को पारिवारिक हालात और सामाजिक जिम्मेदारियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए—ना कि विवाद की नजर से।