बेंगलुरु अदालत का बड़ा फैसला: JDS विधायक एचडी रेवन्ना यौन उत्पीड़न केस में बरी
कोर्ट के फैसले ने बदली सियासी हलचल
बेंगलुरु की एक अदालत ने जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना को 2024 में दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में आरोप साबित नहीं हो सके। फैसले के बाद कर्नाटक की सियासत में नई बहस छिड़ गई है, वहीं रेवन्ना समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया।
अदालत ने कहा: सबूत आरोपों का समर्थन नहीं करते
बेंगलुरु की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के. एन. शिवकुमार ने हासन जिले के होलेनारसीपुर टाउन पुलिस थाने में दर्ज मामले की सुनवाई पूरी करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष जो आरोप लेकर आया था, वे उपलब्ध साक्ष्यों से साबित नहीं हो पाए, इसलिए रेवन्ना को बरी किया जाता है।
2024 में दर्ज हुआ था मामला, बनी थी बड़ी राजनीतिक चर्चा
यह मामला वर्ष 2024 में सामने आया था और उसी समय कर्नाटक की राजनीति में हलचल मच गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद रेवन्ना को कठोर जांच प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। विपक्षी दलों ने उस समय इस मुद्दे को सियासी रंग भी दिया था।
रेवन्ना बोले: न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था
फैसले के बाद एचडी रेवन्ना ने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही न्यायपालिका पर भरोसा था। उनके मुताबिक, यह फैसला सच की जीत है और राजनीतिक कारणों से लगाए गए आरोप अब बेनकाब हो गए हैं। उन्होंने न्यायालय और अपने समर्थकों का आभार जताया।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई प्रतिक्रियाएँ
वहीं, विपक्षी दलों की ओर से इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि JD(S) कार्यकर्ताओं ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए जश्न मनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शिकायतकर्ता चाहे तो फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील कर सकता है। फिलहाल, इस निर्णय के बाद मामला एक नए मोड़ पर पहुँच गया है और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।