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अमेरिका का हुआ ग्रीनलैंड तो रूस पर बढ़ेगा दबाव?

पुतिन ने दिया दो टूक जवाब, ट्रंप ने NATO से ‘डील’ का किया दावा

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी ने एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो महासचिव के साथ ‘भविष्य के समझौते’ का दावा किया है, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस पूरे मामले से खुद को अलग बताते हुए साफ कहा है— “ग्रीनलैंड से हमें कोई लेना-देना नहीं है।”


❄️ ग्रीनलैंड पर क्यों बढ़ी अंतरराष्ट्रीय टेंशन?

ग्रीनलैंड भले ही बर्फ से ढका इलाका हो, लेकिन इसकी रणनीतिक स्थिति इसे सुपरपावर राजनीति का केंद्र बनाती है।

  • यह उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक क्षेत्र के बेहद करीब है
  • रूस और अमेरिका दोनों की सैन्य गतिविधियों पर इसका असर पड़ता है
  • यहां से मिसाइल डिफेंस और निगरानी सिस्टम को मजबूती मिल सकती है

इसी वजह से ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम बता रहा है।


🧊 पुतिन का दो टूक बयान: “इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं”

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 21 जनवरी की देर रात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा—

“ग्रीनलैंड के साथ क्या होता है, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।”

पुतिन ने यह भी जोड़ा कि—

  • यह डेनमार्क और अमेरिका के बीच का मामला है
  • रूस को नहीं लगता कि फिलहाल किसी तीसरे पक्ष की इसमें दिलचस्पी होगी

उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि—

  • 1867 में रूस ने अलास्का अमेरिका को बेचा था
  • 1917 में डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने पर विचार किया था

🇺🇸 ट्रंप का बड़ा दावा: NATO के साथ ‘फ्रेमवर्क’ तय

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के दौरान बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा—

  • ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनकी नाटो महासचिव मार्क रुटे से बातचीत हुई है
  • दोनों ‘भविष्य के समझौते की रूपरेखा’ पर सहमत हुए हैं

ट्रंप ने यह भी साफ किया कि—

“हम ग्रीनलैंड को बलपूर्वक नहीं लेंगे।”


💰 टैरिफ पर यू-टर्न, यूरोप को राहत

ट्रंप ने एक और अहम ऐलान करते हुए कहा कि—

  • ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले संभावित टैरिफ अब रद्द किए जा रहे हैं

इस फैसले को यूरोप के साथ रिश्तों में तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।


🔍 रूस के लिए खतरा क्यों माना जा रहा है ग्रीनलैंड?

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण बढ़ता है तो—

  • रूस की आर्कटिक सैन्य गतिविधियों पर निगरानी आसान होगी
  • नाटो की मौजूदगी रूस के और करीब आ जाएगी

हालांकि पुतिन का बयान संकेत देता है कि फिलहाल रूस इस मुद्दे को सीधा टकराव नहीं बनाना चाहता।


ग्रीनलैंड अब केवल बर्फीला द्वीप नहीं, बल्कि सुपरपावर रणनीति का अहम मोहरा बन चुका है।
जहां ट्रंप इसे अमेरिका की सुरक्षा से जोड़ रहे हैं, वहीं पुतिन फिलहाल दूरी बनाकर रखे हुए हैं।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला केवल कूटनीति तक सीमित रहेगा या आर्कटिक में नई शक्ति-संतुलन की शुरुआत बनेगा।

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