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Gold-Silver Outlook Today: सोना सुस्त, चांदी सुपरहिट! क्यों 2026 तक ₹2.5 लाख का बन रहा है मजबूत केस

2025 में अगर किसी एक मेटल ने निवेशकों का ध्यान खींचा है, तो वह है *चांदी (Silver)। साल की शुरुआत से अब तक करीब *120 फीसदी की जोरदार तेजी के साथ चांदी ने ₹2 लाख प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छू लिया है। यह उछाल 1979 के बाद सबसे बड़ा वार्षिक प्रदर्शन माना जा रहा है।

अब जानकारों का कहना है कि यह तेजी यहीं थमने वाली नहीं है और 2026 तक चांदी ₹2.40–₹2.50 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है।


क्यों फीकी पड़ी सोने की चमक?

जहां एक ओर सोना सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, वहीं चांदी ने निवेश और इंडस्ट्रियल दोनों मोर्चों पर बढ़त बना ली है।

  • सोना अभी भी सुरक्षित निवेश बना हुआ है
  • लेकिन हाई ग्रोथ थीम फिलहाल चांदी के पक्ष में जाती दिख रही है

यही वजह है कि पोर्टफोलियो में चांदी की हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।


चांदी में तेजी का असली कारण क्या है?

सप्लाई संकट सबसे बड़ा फैक्टर

Axis Direct के मुताबिक, दुनिया भर में चांदी की माइनिंग करीब 810 मिलियन औंस पर अटकी हुई है, जो पिछले पांच सालों से लगभग स्थिर है।

  • चांदी का 70–80% उत्पादन तांबा, सीसा और जिंक की माइनिंग से बायप्रोडक्ट के रूप में आता है
  • इन धातुओं की मांग सीमित होने के कारण चांदी की सप्लाई तेजी से बढ़ नहीं सकती

यानी कीमत बढ़ने के बावजूद सप्लाई में तुरंत इजाफा संभव नहीं है।


सोलर सेक्टर बना गेमचेंजर

चांदी की मांग में सबसे बड़ा बदलाव सोलर फोटोवोल्टिक इंडस्ट्री से आया है।

  • 2020: सोलर सेक्टर की चांदी खपत – 94.4 मिलियन औंस
  • 2024: खपत बढ़कर – 243.7 मिलियन औंस

अब सोलर इंडस्ट्री अकेले ग्लोबल सिल्वर डिमांड का करीब 21% हिस्सा ले रही है, जिससे मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।


ग्लोबल मार्केट में भी टाइटनेस

COMEX और लंदन स्पॉट मार्केट के बीच चल रहे प्रीमियम ने अमेरिका को आक्रामक रूप से चांदी इम्पोर्ट करने के लिए मजबूर किया है।

  • लंदन के वॉल्ट्स से चांदी निकल रही है
  • ग्लोबल लिक्विडिटी घट रही है
  • COMEX इन्वेंट्री बढ़ रही है, लेकिन वह दूसरे बाजारों से खींचा गया स्टॉक है

इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई और तंग हो गई है।


टेक्निकल चार्ट क्या कहता है?

Axis Direct के टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार—

  • चांदी ने 10 साल पुराना बॉटमिंग पैटर्न तोड़ दिया है
  • अगर कीमत *$67 के ऊपर टिकती है, तो अगला टारगेट *$76–$80** हो सकता है
  • $65 के आसपास हल्की रुकावट संभव है

यह संकेत देता है कि लंबी अवधि की ट्रेंड अब भी मजबूत है।


निवेश का सही मौका कब?

Axis Direct की सलाह के मुताबिक—

  • अगर घरेलू बाजार में चांदी ₹1.70–₹1.78 लाख प्रति किलो के दायरे में आती है
  • तो इसे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा सकता है

🎯 लॉन्ग टर्म टारगेट (2026): ₹2.40–₹2.50 लाख प्रति किलो


निष्कर्ष: महंगी नहीं, दोबारा मूल्यांकित हो रही है चांदी

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रैली सिर्फ कीमतों की तेजी नहीं, बल्कि चांदी का री-रेटिंग फेज है।

  • सप्लाई की कमी
  • इंडस्ट्रियल डिमांड
  • और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी

इन तीनों फैक्टर्स के चलते चांदी की यह तेजी टिकाऊ मानी जा रही है और अभी इसमें और दम बाकी है।

निवेशकों का रुख बदला, चांदी बनी 2025 की सबसे चर्चित धातु

2025 में अगर किसी एक मेटल ने निवेशकों का ध्यान खींचा है, तो वह है *चांदी (Silver)। साल की शुरुआत से अब तक करीब *120 फीसदी की जोरदार तेजी के साथ चांदी ने ₹2 लाख प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छू लिया है। यह उछाल 1979 के बाद सबसे बड़ा वार्षिक प्रदर्शन माना जा रहा है।

अब जानकारों का कहना है कि यह तेजी यहीं थमने वाली नहीं है और 2026 तक चांदी ₹2.40–₹2.50 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है।


क्यों फीकी पड़ी सोने की चमक?

जहां एक ओर सोना सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, वहीं चांदी ने निवेश और इंडस्ट्रियल दोनों मोर्चों पर बढ़त बना ली है।

  • सोना अभी भी सुरक्षित निवेश बना हुआ है
  • लेकिन हाई ग्रोथ थीम फिलहाल चांदी के पक्ष में जाती दिख रही है

यही वजह है कि पोर्टफोलियो में चांदी की हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।


चांदी में तेजी का असली कारण क्या है?

सप्लाई संकट सबसे बड़ा फैक्टर

Axis Direct के मुताबिक, दुनिया भर में चांदी की माइनिंग करीब 810 मिलियन औंस पर अटकी हुई है, जो पिछले पांच सालों से लगभग स्थिर है।

  • चांदी का 70–80% उत्पादन तांबा, सीसा और जिंक की माइनिंग से बायप्रोडक्ट के रूप में आता है
  • इन धातुओं की मांग सीमित होने के कारण चांदी की सप्लाई तेजी से बढ़ नहीं सकती

यानी कीमत बढ़ने के बावजूद सप्लाई में तुरंत इजाफा संभव नहीं है।


सोलर सेक्टर बना गेमचेंजर

चांदी की मांग में सबसे बड़ा बदलाव सोलर फोटोवोल्टिक इंडस्ट्री से आया है।

  • 2020: सोलर सेक्टर की चांदी खपत – 94.4 मिलियन औंस
  • 2024: खपत बढ़कर – 243.7 मिलियन औंस

अब सोलर इंडस्ट्री अकेले ग्लोबल सिल्वर डिमांड का करीब 21% हिस्सा ले रही है, जिससे मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।


ग्लोबल मार्केट में भी टाइटनेस

COMEX और लंदन स्पॉट मार्केट के बीच चल रहे प्रीमियम ने अमेरिका को आक्रामक रूप से चांदी इम्पोर्ट करने के लिए मजबूर किया है।

  • लंदन के वॉल्ट्स से चांदी निकल रही है
  • ग्लोबल लिक्विडिटी घट रही है
  • COMEX इन्वेंट्री बढ़ रही है, लेकिन वह दूसरे बाजारों से खींचा गया स्टॉक है

इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई और तंग हो गई है।


टेक्निकल चार्ट क्या कहता है?

Axis Direct के टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार—

  • चांदी ने 10 साल पुराना बॉटमिंग पैटर्न तोड़ दिया है
  • अगर कीमत *$67 के ऊपर टिकती है, तो अगला टारगेट *$76–$80** हो सकता है
  • $65 के आसपास हल्की रुकावट संभव है

यह संकेत देता है कि लंबी अवधि की ट्रेंड अब भी मजबूत है।


निवेश का सही मौका कब?

Axis Direct की सलाह के मुताबिक—

  • अगर घरेलू बाजार में चांदी ₹1.70–₹1.78 लाख प्रति किलो के दायरे में आती है
  • तो इसे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा सकता है

🎯 लॉन्ग टर्म टारगेट (2026): ₹2.40–₹2.50 लाख प्रति किलो


महंगी नहीं, दोबारा मूल्यांकित हो रही है चांदी

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रैली सिर्फ कीमतों की तेजी नहीं, बल्कि चांदी का री-रेटिंग फेज है।

  • सप्लाई की कमी
  • इंडस्ट्रियल डिमांड
  • और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी

इन तीनों फैक्टर्स के चलते चांदी की यह तेजी टिकाऊ मानी जा रही है और अभी इसमें और दम बाकी है।

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