फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर सियासी घमासान, मायावती ने ब्राह्मण समाज के समर्थन में उठाई बैन की मांगफिल्म के टाइटल को लेकर देशभर में विरोध
आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही गंभीर विवादों में फंस गई है। फिल्म के नाम को लेकर ब्राह्मण समाज ने कड़ा ऐतराज जताया है। समाज का कहना है कि फिल्म का टाइटल जातिसूचक और अपमानजनक है, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। इस विरोध के चलते कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं और अलग-अलग राज्यों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
मायावती ने केंद्र सरकार से की प्रतिबंध की मांग
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि फिल्मों और अन्य माध्यमों में ‘पंडित’ शब्द का गलत और अपमानजनक प्रयोग किया जा रहा है, जिससे पूरे ब्राह्मण समाज में रोष है।
मायावती ने इसे गंभीर विषय बताते हुए केंद्र सरकार से इस फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की और कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की फिल्मों की कड़े शब्दों में निंदा करती है।
फिल्म निर्देशक नीरज पांडेय ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के निर्देशक नीरज पांडेय की ओर से सफाई सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के नाम के रूप में किया गया है।
निर्देशक के अनुसार फिल्म की कहानी किसी जाति, धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाती, बल्कि एक व्यक्ति के फैसलों और उसके आचरण पर आधारित है।
भोपाल से लखनऊ तक सड़कों पर उतरा विरोध
फिल्म के खिलाफ विरोध सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। भोपाल, लखनऊ सहित कई शहरों में ब्राह्मण समाज के संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म का नाम सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है और इसे तुरंत बदला या रोका जाना चाहिए।
लखनऊ में दर्ज हुई FIR
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के खिलाफ FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का टाइटल जातिसूचक और आपत्तिजनक है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर की गई है।
जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर फिल्म निर्माताओं की सफाई सामने है। अब सबकी नजर सरकार और सेंसर बोर्ड की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।