🚨 कोरिया के सपने, डर और आख़िरी टास्क… क्या है ‘कोरियन लव गेम’ जिसने गाजियाबाद की तीन बहनों की जान ले ली?
गाजियाबाद | क्राइम & साइबर डेस्क
गाजियाबाद से सामने आया एक दर्दनाक मामला पूरे देश के माता-पिता को झकझोर रहा है। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के ज़रिये फैल रहे एक कथित ‘कोरियन लव गेम’ की गिरफ्त में आकर तीन नाबालिग बहनों ने अपनी जान दे दी। यह घटना न सिर्फ़ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल भी है।
🕯️ नौवीं मंज़िल से छलांग, एक ही परिवार में तीन मौतें
मंगलवार देर रात, 3 फरवरी को गाजियाबाद के एक हाई-राइज़ अपार्टमेंट की नौवीं मंज़िल से कूदकर तीन सगी बहनों की मौत हो गई। पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों बच्चियां लंबे समय से एक ऑनलाइन कोरियन-थीम गेम से जुड़ी थीं।
📝 सुसाइड नोट ने बढ़ाई चिंता
परिवार और पुलिस के मुताबिक, बच्चियों द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में लिखा था—
“हम कोरिया नहीं छोड़ सकते, कोरिया हमारी ज़िंदगी है, कोरियन हमारी जान हैं।”
यही पंक्तियां जांच एजेंसियों को उस ऑनलाइन गेम तक ले गईं, जिसने कथित तौर पर बच्चियों को मानसिक रूप से जकड़ लिया था।
🎮 क्या है ‘कोरियन लव गेम’?
पुलिस जांच में जिस गेम का ज़िक्र सामने आया, उसका नाम बताया जा रहा है—
“We Are Not Indians, We Are Koreans”
यह कोई सामान्य मोबाइल गेम नहीं, बल्कि एक ऑनलाइन इंटरएक्टिव साइकोलॉजिकल गेम है, जहां स्क्रीन के पीछे बैठा कोई व्यक्ति खुद को कोरियाई या विदेशी युवक-युवती बताकर खिलाड़ियों से बातचीत शुरू करता है।
💬 दोस्ती से कंट्रोल तक का खतरनाक सफर
इस गेम में शुरुआत दोस्ती, अपनापन और प्यार से होती है। बच्चों का भरोसा जीतने के लिए पहले बेहद आसान टास्क दिए जाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे जुड़ाव बढ़ता है, टास्क मुश्किल और मानसिक रूप से दबाव डालने वाले हो जाते हैं।
⚠️ धमकी और डर का इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक, जब कोई खिलाड़ी टास्क करने से मना करता है या दूरी बनाना चाहता है, तो उसे धमकियां दी जाती हैं—
कभी निजी जानकारी लीक करने की, तो कभी परिवार को नुकसान पहुंचाने की। यही डर बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ देता है।
🐋 ब्लू व्हेल गेम से मिलती-जुलती खतरनाक संरचना
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कोरियन लव गेम’ का पैटर्न कुख्यात ब्लू व्हेल चैलेंज से काफी मिलता-जुलता है।
ब्लू व्हेल गेम में भी पहले आसान टास्क, फिर डर, अलगाव और अंत में आत्मघाती कदम तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
🧠 मनोवैज्ञानिक पकड़ सबसे बड़ा हथियार
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे गेम बच्चों की भावनात्मक कमजोरी, पहचान की तलाश और अकेलेपन का फायदा उठाते हैं। खासकर किशोर उम्र में, जब बच्चे किसी स्टार कल्चर या विदेशी पहचान से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।
👨👩👧 माता-पिता के लिए चेतावनी
यह मामला साफ संकेत देता है कि बच्चों की डिजिटल दुनिया पर नजर रखना अब विकल्प नहीं, ज़रूरत बन चुका है। मोबाइल में कौन-सा ऐप, किससे चैट, किस तरह का कंटेंट—सब पर संवेदनशील निगरानी जरूरी है।
📊 यह सिर्फ़ एक केस नहीं
गाजियाबाद की यह घटना एक चेतावनी है कि ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया अब सिर्फ़ मनोरंजन नहीं रहे। गलत हाथों में ये प्लेटफॉर्म बच्चों की मानसिक सेहत के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
🛡️ सावधानी ही बचाव है
- बच्चों से नियमित बातचीत करें
- उनके ऑनलाइन व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें
- अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत पर रोक लगाएं
- ज़रूरत पड़े तो काउंसलिंग लें