‘जीनोसाइड इमरजेंसी’: उइघुर मुस्लिमों पर चीन के दमन को लेकर वॉशिंगटन की संस्था का बड़ा अलर्ट
शिनजियांग पर गंभीर आरोप
चीन के शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुस्लिमों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता एक बार फिर तेज हो गई है। वॉशिंगटन स्थित गैर-सरकारी संगठन Genocide Watch ने अपनी ताजा रिपोर्ट में शिनजियांग को लेकर ‘Genocide Emergency’ घोषित की है। संस्था का आरोप है कि चीनी सरकार उइघुरों की सांस्कृतिक पहचान को मिटाने और उन्हें व्यवस्थित रूप से दबाने का अभियान चला रही है।
📄 रिपोर्ट में क्या कहा गया है
“Genocide Emergency: Xinjiang, China 2025” नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र (XUAR) में लगभग 1.2 करोड़ उइघुर मुसलमान रहते हैं, जिन्हें व्यापक दमन और निगरानी का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) उइघुर संस्कृति, भाषा और धार्मिक परंपराओं को कमजोर करने के लिए एक सुनियोजित रणनीति अपना रही है। हान चीनी संस्कृति और कम्युनिस्ट विचारधारा को जबरन थोपा जा रहा है, जबकि उइघुर सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं को खत्म कर उनकी जगह सरकार-नियंत्रित ढांचे खड़े किए जा रहे हैं।
🕰️ कब से चल रहा है उत्पीड़न
Genocide Watch का कहना है कि उइघुरों पर दबाव कोई नई बात नहीं है।
1990 के दशक से ही चीन की “उत्तर-पश्चिम विकास योजना” के तहत लाखों हान चीनी नागरिकों को शिनजियांग में बसाया गया। इससे उइघुर आबादी पर जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक दबाव बढ़ता चला गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सैकड़ों हजारों, और संभवतः लाखों उइघुरों को तथाकथित “पुनर्शिक्षा केंद्रों” में हिरासत में लिया गया। कई मामलों में हान चीनी निगरानीकर्ताओं को जबरन उइघुर परिवारों के घरों में ठहराया गया, ताकि असहमति पर नजर रखी जा सके।
⚠️ ‘आतंकवाद विरोध’ की आड़ में दमन?
चीनी सरकार इन कदमों को आतंकवाद-विरोधी अभियान बताती रही है, लेकिन Genocide Watch के अनुसार उपलब्ध सबूत दिखाते हैं कि ये नीतियां किसी आतंकी गतिविधि के बजाय उइघुर समुदाय को एक जातीय और धार्मिक समूह के रूप में निशाना बनाती हैं।
🛰️ निगरानी और दमन का तंत्र
रिपोर्ट बताती है कि शिनजियांग आज दुनिया के सबसे अधिक निगरानी वाले इलाकों में शामिल है।
यहां उइघुरों पर:
- AI आधारित निगरानी
- बायोमेट्रिक डेटा संग्रह
- जगह-जगह बने “कन्वीनिएंट पुलिस स्टेशनों”
के जरिए कड़ी नजर रखी जाती है।
इन उपायों से आवाजाही, धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक जीवन पर सख्त नियंत्रण लागू किया गया है।
🚨 20 लाख तक हिरासत में होने का दावा
रिपोर्ट का सबसे गंभीर दावा यह है कि 2017 के बाद से 8 लाख से 20 लाख तक उइघुर सामूहिक हिरासत केंद्रों में बंद किए गए।
इन केंद्रों में:
- जबरन राजनीतिक विचारधारा थोपना
- शारीरिक और मानसिक शोषण
- यौन हिंसा
- सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मिटाने के प्रयास
जैसे आरोप लगाए गए हैं।
उइघुर भाषा के इस्तेमाल पर रोक और इस्लाम छोड़ने का दबाव बनाए जाने की भी बात कही गई है। कई मस्जिदों को ध्वस्त किए जाने का दावा भी रिपोर्ट में शामिल है।
मानवाधिकार बनाम वैश्विक राजनीति
Genocide Watch की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब चीन पहले से ही मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर पश्चिमी देशों के निशाने पर है।
हालांकि बीजिंग इन आरोपों को खारिज करता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और रिपोर्टों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि शिनजियांग का मुद्दा आने वाले समय में चीन-पश्चिम संबंधों का बड़ा तनाव बिंदु बना रह सकता है।
यह रिपोर्ट न केवल चीन की आंतरिक नीतियों पर सवाल उठाती है, बल्कि वैश्विक समुदाय के सामने यह भी चुनौती रखती है कि वह मानवाधिकारों के मुद्दे पर कितना और कैसे दबाव बना सकता है।