विवादित किताब पर बोले पूर्व सेना प्रमुख नरवणे, ‘यही है असली स्टेटस’—पोस्ट से बढ़ी सियासी हलचल….
पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। उनके संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट संदेश ने किताब की स्थिति पर चल रही अटकलों को नया मोड़ दे दिया है।
सोशल मीडिया पोस्ट से तोड़ी चुप्पी
जनरल नरवणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस के बयान का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा—“यही किताब का वर्तमान स्टेटस है।” इस एक पंक्ति के संदेश को उनके आधिकारिक रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि किताब फिलहाल प्रकाशन प्रक्रिया में ही है।
संसद में चर्चा के बाद बढ़ा विवाद
यह मुद्दा उस समय सुर्खियों में आया जब लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किताब के कुछ कथित अंशों का उल्लेख करने की कोशिश की। सत्ता पक्ष के विरोध के कारण उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया, जिसके बाद संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस किताब को लेकर बहस तेज हो गई।
प्रकाशक का रुख और ‘अप्रकाशित’ स्थिति
प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी औपचारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है और इसके कथित अंशों का प्रसार अधिकृत नहीं है। नरवणे द्वारा उसी बयान का समर्थन किए जाने को प्रकाशन प्रक्रिया की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।
FIR दर्ज होने से कानूनी पहलू भी जुड़ा
किताब के अंशों के कथित अवैध प्रसार को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद मामला कानूनी दायरे में भी आ गया है। इससे विवाद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कॉपीराइट और प्रकाशन अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा भी बन गया है।
विपक्ष और सरकार के अलग-अलग दावे
विपक्ष का आरोप है कि किताब में कुछ ऐसे मुद्दों—जैसे अग्निपथ योजना या सीमावर्ती हालात—पर उल्लेख हो सकता है जो सरकार के लिए असहज हों। वहीं सरकार या प्रकाशक की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है कि पुस्तक को रोका गया है; उनका कहना है कि यह सामान्य संपादकीय प्रक्रिया का हिस्सा है।
विवाद के बीच संतुलित संकेत
विश्लेषकों के अनुसार, नरवणे का संक्षिप्त बयान विवाद को सीधे राजनीतिक बहस में उलझाने के बजाय प्रकाशक के आधिकारिक रुख को आगे रखने की कोशिश माना जा सकता है। इससे गेंद फिलहाल प्रकाशन प्रक्रिया और कानूनी जांच के पाले में चली गई है, जबकि राजनीतिक बहस जारी रहने के आसार हैं।