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ईरान पर दबाव बढ़ा, यूरोप ने उठाया सबसे सख्त कदम

IRGC को आतंकी संगठन घोषित करने का फैसला

ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंकाओं के बीच यूरोपीय संघ ने बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक फैसला लिया है। यूरोपीय संघ ने ईरान की अर्धसैनिक शक्ति इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल कर लिया है।

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई बनी वजह

यूरोपीय संघ का कहना है कि ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचले जाने के कारण यह कदम उठाया गया। ब्रसेल्स की ओर से साफ किया गया कि तेहरान सरकार और IRGC की हिंसक कार्रवाई अब अस्वीकार्य स्तर पर पहुंच चुकी है।

EU नेतृत्व ने फैसले का किया समर्थन

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस फैसले का खुले तौर पर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चुप्पी साधना अब विकल्प नहीं रह गया है और IRGC की भूमिका को दुनिया के सामने लाना जरूरी था।

EU की शीर्ष राजनयिक का कड़ा बयान

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने कहा कि जो शासन अपने ही नागरिकों की बड़े पैमाने पर हत्या करता है, उसका पतन तय होता है। उन्होंने कहा कि IRGC को अब अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों की श्रेणी में रखा गया है।

पहले भी लगाए जा चुके हैं प्रतिबंध

इससे पहले यूरोपीय संघ ईरान के 15 वरिष्ठ अधिकारियों और IRGC के शीर्ष कमांडरों पर प्रतिबंध लगा चुका है। पश्चिमी मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इस महीने की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 6,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें IRGC की भूमिका प्रमुख रही।

1979 की क्रांति से जन्मी ताकत

IRGC की स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी। शुरुआत में यह एक सीमित सैन्य बल था, लेकिन समय के साथ यह ईरान की सबसे प्रभावशाली शक्ति बन गया, जिसकी पकड़ सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था तीनों पर मजबूत हो चुकी है।

सेना, नौसेना और वायुसेना तक फैला नेटवर्क

IRGC के पास अपनी अलग थल सेना, नौसेना और वायुसेना है। इसके साथ ही इसकी एक शक्तिशाली खुफिया शाखा भी है। अनुमान है कि IRGC के अधीन करीब 1.25 लाख सैनिक कार्यरत हैं।

ईरान में असली सत्ता किसके हाथ?

हालिया हालात में भले ही सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सर्वोच्च नेता माने जाते हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ज़मीनी स्तर पर वास्तविक शक्ति अब IRGC के हाथों में केंद्रित हो चुकी है।


IRGC को आतंकी संगठन घोषित करना केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मोर्चे के और सख्त होने का संकेत है। अमेरिका के संभावित सैन्य कदम और यूरोपीय संघ के इस फैसले से तेहरान की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में यह फैसला ईरान की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और आंतरिक सत्ता संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।

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