राठीखेड़ा में इथेनॉल फैक्टरी विवाद भड़का: दूसरे दिन भी इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू—किसानों का आंदोलन तेज
राठीखेड़ा में विवाद चरम पर, सुरक्षा कड़ी—किसानों की जंग जारी
हनुमानगढ़ के राठीखेड़ा में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्टरी को लेकर पिछले 15 महीनों से simmer कर रहा विरोध अब बड़े टकराव में बदल गया है। दूसरे दिन भी इंटरनेट बंद है, धारा 144 लागू है और भारी पुलिस बल तैनात है। इसी तनाव के बीच निर्माण कार्य जारी है, जबकि किसान रोज बैठक कर आंदोलन की नई रणनीति तय कर रहे हैं।
विरोध की लपटें तेज—इथेनॉल प्लांट बना संघर्ष का केंद्र
राठीखेड़ा में इथेनॉल फैक्टरी के निर्माण को लेकर किसानों का विरोध फिर भड़क गया है। किसानों का कहना है कि यह प्लांट खेतों, पर्यावरण और पानी पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। वे डेढ़ साल से विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनके मुताबिक प्रशासन उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा है।
प्रशासन सख्त—इंटरनेट बंद और धारा 144 लागू
तनाव बढ़ने के बाद प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं दूसरे दिन भी बंद रखीं। साथ ही, धारा 144 लागू कर दी गई है, जिससे किसी भी प्रकार के जमावड़े, प्रदर्शन या रैली पर रोक है। इलाके में भारी पुलिस तैनाती की गई है और गांव सुरक्षा की दृष्टि से छावनी में बदल गया है।
गिरफ्तारियों से गरमाया माहौल—किसान नेताओं पर कसे शिकंजे
कई किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने से गुस्सा और बढ़ गया है। स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए सामूहिक गिरफ्तारी दी। किसान संगठनों का कहना है कि यह दमनात्मक कार्रवाई आंदोलन को दबाने की कोशिश है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं।
किसानों की चिंता—खेती, पानी और पर्यावरण पर खतरे का आरोप
किसानों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला अपशिष्ट जल भूजल और मिट्टी को प्रदूषित करेगा। वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बड़ी चिंता हैं। उनका कहना है कि खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्थिति खतरे में पड़ सकती है।
वार्ता की उम्मीद—कलेक्टर से मिलने की तैयारी
किसान संगठनों और प्रशासन के बीच वार्ता की संभावनाएँ बनी हैं। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक गिरफ्तार साथियों को छोड़ा नहीं जाता और निर्माण पर रोक का आश्वासन नहीं मिलता, वे आंदोलन जारी रखेंगे। बुधवार को जिला प्रशासन से बैठक तय है, जिससे किसी समाधान की उम्मीद की जा रही है।
विकास बनाम पर्यावरण—संघर्ष किस ओर जाएगा?
यह विवाद सिर्फ विकास परियोजना का विरोध नहीं, बल्कि पर्यावरण और आजीविका की लड़ाई भी है। इंटरनेट बंद और धारा 144 जैसे कदम प्रशासन की नियंत्रण रणनीति हो सकते हैं, लेकिन इससे लोकतांत्रिक आवाज़ों के दबने का खतरा भी है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष राजस्थान में विकास और पर्यावरण संतुलन की बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। वार्ता सफल होती है या टकराव और बढ़ता है — इसका फैसला आने वाले 48 घंटे में तय हो सकता है।