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अरावली के साथ दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं: टीकाराम जूली का सरकार पर हमला, ‘सेव अरावली’ अभियान तेज करने का ऐलान…

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य सरकार पर अरावली पर्वतमाला को नष्ट करने की साजिश का गंभीर आरोप लगाया है। जूली ने कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के वन मंत्री और राजस्थान सरकार अरावली के हजारों साल पुराने पेड़ों और पहाड़ों को काटने की तैयारी में लगे हैं।

जूली ने सवाल उठाया कि अरावली क्षेत्र से आने वाले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव अरावली का “चीरहरण” होते हुए कैसे देख सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अवैध खनन माफियाओं और अपने उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियों में बदलाव कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस “सेव अरावली” अभियान के जरिए आम जनता को जोड़ेगी और इस मुद्दे पर पूरी ताकत से संघर्ष करेगी। उन्होंने बताया कि इस मसले पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने से पहले ही आवाज उठाई थी। उदयपुर में आंदोलन शुरू हो चुका है और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए अभियान को आगे बढ़ाया है। आने वाले समय में कांग्रेस गांव-गांव और ढाणी-ढाणी जाकर जनजागरण करेगी।

जूली ने कहा कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण निर्माण कार्य, डीजल जनरेटर, बाहरी वाहनों और तंदूरों तक पर रोक है, जबकि यहां अरावली के पहाड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है। अरावली चार राज्यों में फैली है, जिसमें से करीब 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में आता है। सरकार अगर कोर्ट से मंजूरी लेकर 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ों को अरावली की श्रेणी से बाहर कर देती है, तो करीब 11 हजार पहाड़ खनन के दायरे में आ जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन खदानों को भाजपा अपने उद्योगपति मित्रों और कार्यकर्ताओं को देना चाहती है। जूली ने कहा कि भूपेंद्र यादव का गांव हरियाणा के बिलासपुर के पास है, जहां भी अरावली की पहाड़ियां हैं। पुष्कर-अजमेर, जहां से उन्होंने पढ़ाई की, पहाड़ियों से घिरा है और अलवर उनका संसदीय क्षेत्र है, जो पूरी तरह अरावली की गोद में बसा हुआ है। पांडूपोल, भर्तृहरि धाम, करणी माता मंदिर सहित हजारों धार्मिक स्थल अरावली क्षेत्र में स्थित हैं।

जूली ने 2010 के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार ने रोजगार बचाने के उद्देश्य से 100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा का तर्क दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन के भीतर ही इसे खारिज कर दिया था। इसके बावजूद आज 2024-25 में उसी तर्क को दोबारा लागू करने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह गलत है।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अवैध खनन के खिलाफ 1400 एफआईआर दर्ज की गईं, सैटेलाइट इमेजरी से निगरानी की गई और एसपी व कलेक्टर की जिम्मेदारी तय की गई। भरतपुर में साधु-संतों के विरोध के बाद 46 खनन लीज बंद कर उस क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित किया गया, जो कांग्रेस की जनभावना के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जूली ने कहा कि अरावली पहाड़ियां रेगिस्तान और लू को रोकती हैं, भूजल रिचार्ज करती हैं और अगर अरावली न होती तो रेगिस्तान दिल्ली तक फैल जाता। अब सरकार हजारों साल पुराने पेड़ों और पहाड़ों को खत्म करने पर तुली हुई है। यह केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है।

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