धर्मेंद्र चाहते थे अमिताभ बच्चन को समधी बनाना, लेकिन ईशा देओल के फैसले से रिश्तेदारी नहीं बन पाई
बॉलीवुड में कई दोस्तियां वक्त के साथ रिश्तेदारी में बदलती रही हैं, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की गहरी दोस्ती इसके बावजूद पारिवारिक रिश्ते में तब्दील नहीं हो सकी। वजह थीं ईशा देओल, जिनके एक फैसले ने जय–वीरू की दोस्ती को भाईचारे तक ही सीमित रखा।
🔹 शोले से शुरू हुई थी खास दोस्ती
धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने ‘शोले’ समेत कई फिल्मों में साथ काम किया। ऑनस्क्रीन जय–वीरू की जोड़ी ने दर्शकों के दिल जीते, वहीं ऑफस्क्रीन दोनों के बीच मजबूत बॉन्डिंग बनी। इसी नजदीकी के चलते धर्मेंद्र अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलना चाहते थे।
🔹 हेमा मालिनी की भी थी यही ख्वाहिश
बताया जाता है कि हेमा मालिनी भी चाहती थीं कि उनकी बड़ी बेटी ईशा देओल की शादी बच्चन परिवार में हो। उस वक्त अमिताभ बच्चन के इकलौते बेटे अभिषेक बच्चन इस रिश्ते के केंद्र में थे।
🔹 ईशा देओल ने क्यों ठुकराया रिश्ता
जब यह बात ईशा देओल तक पहुंची, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया।
ईशा का कहना था कि वे अभिषेक बच्चन को भाई की तरह देखती हैं, और इसी कारण उन्होंने इस रिश्ते को आगे बढ़ाने से मना कर दिया। यहीं पर वह संभावना खत्म हो गई, जिसमें दो दिग्गज परिवार रिश्तेदारी में बंध सकते थे।
🔹 दोनों की ज़िंदगी आगे कैसे बढ़ी
- अभिषेक बच्चन ने साल 2007 में ऐश्वर्या राय बच्चन से शादी की।
- ईशा देओल ने भरत तख्तानी से विवाह किया, हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए।
- ईशा देओल ने 2024 में आपसी सहमति से अलग होने की पुष्टि की।
- इस रिश्ते से ईशा की दो बेटियां हैं, जिनकी परवरिश वे खुद कर रही हैं।
🔹 बच्चन परिवार पर तलाक की अफवाहें
बीते समय में अभिषेक और ऐश्वर्या के रिश्ते को लेकर कई अफवाहें उड़ीं, लेकिन कपल ने कभी इन खबरों की पुष्टि नहीं की। सार्वजनिक मौकों और पारिवारिक कार्यक्रमों में दोनों की मौजूदगी ने इन चर्चाओं को खारिज किया।
🔹 धर्मेंद्र को लेकर फैली थी गलत खबर
सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र के निधन को लेकर जो खबरें सामने आई थीं, वे पूरी तरह अफवाह थीं।
धर्मेंद्र स्वस्थ हैं और समय-समय पर सार्वजनिक रूप से नज़र भी आते रहे हैं। इस तरह की खबरों का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
🔹 क्यों खास है यह किस्सा
यह कहानी सिर्फ एक अधूरा रिश्ता नहीं, बल्कि बॉलीवुड की उस संस्कृति को दिखाती है जहां व्यक्तिगत फैसले सबसे ऊपर होते हैं। ईशा देओल के फैसले ने यह साफ किया कि स्टार परिवारों में भी रिश्ते सम्मति और भावनात्मक सहजता से ही तय होते हैं, दबाव से नहीं।