विकास बनाम विस्थापन—रामगढ़ में रेलवे ओवरब्रिज के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग
अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे में नेशनल हाईवे-248 पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) को लेकर जनविरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना विकास के नाम पर सैकड़ों परिवारों के रोजगार और आवास को खतरे में डाल रही है। हाईकोर्ट के 75 मीटर तक अतिक्रमण हटाने के आदेश और प्रस्तावित पुल निर्माण के संयुक्त प्रभाव से व्यापारिक और रिहायशी क्षेत्र व्यापक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इसी के विरोध में ‘रामगढ़ बचाओ समिति’ के नेतृत्व में लोगों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर वैकल्पिक समाधान की मांग उठाई।
विरोध प्रदर्शन में उमड़ा जनसैलाब, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
सोमवार को ‘रामगढ़ बचाओ समिति’ के नेतृत्व में नगर पालिका क्षेत्र के सैकड़ों लोग एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में दुकानदार, किसान, व्यापारी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। लोगों ने मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज के स्थान पर अंडरपास बनाया जाए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश और परियोजना से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों की चिंता का एक बड़ा कारण हाईकोर्ट के वे आदेश हैं, जिनमें नेशनल हाईवे के केंद्र से लगभग 75 मीटर तक आने वाले अतिक्रमण को हटाने का प्रावधान है। पहले से चिन्हित क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुकानें, मकान और प्रतिष्ठान आते हैं। अब प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण के साथ यह प्रक्रिया तेज होने की आशंका है। लोगों का कहना है कि कानूनी कार्रवाई और विकास परियोजना का संयुक्त प्रभाव उन्हें पूरी तरह विस्थापन की स्थिति में ला सकता है, जिससे वर्षों से स्थापित आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।
व्यापार और आजीविका पर मंडराता बड़ा खतरा
प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज से सबसे अधिक असर निचले क्षेत्रों में स्थित दुकानों और व्यवसायों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पुल बनने के बाद मुख्य आवाजाही ऊपर शिफ्ट हो जाएगी, जिससे नीचे की दुकानों की पहुंच और दृश्यता कम हो जाएगी। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा और छोटे व्यापारियों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। कई लोगों ने इसे “धीरे-धीरे आर्थिक खत्म होने” जैसी स्थिति बताया है।
अंडरपास और बाईपास को बताया बेहतर विकल्प
स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों ने वैकल्पिक समाधान के रूप में अंडरपास और कस्बे के बाहर बाईपास रोड बनाने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि इससे बाजार और रिहायशी इलाकों को नुकसान से बचाया जा सकता है। साथ ही भारी वाहनों का दबाव कस्बे से बाहर रहेगा, जिससे यातायात सुगम होगा। लोगों का मानना है कि इस विकल्प से विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाया जा सकता है, बिना किसी बड़े सामाजिक या आर्थिक नुकसान के।
सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी जताई आपत्ति
इस विरोध में केवल व्यापारी ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी शामिल हुईं। रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताओं को अलग-अलग ज्ञापनों के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाया। उनका कहना है कि परियोजना की जद में आने वाले धार्मिक स्थल और सामुदायिक ढांचे सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करेंगे। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि विकास के साथ सामाजिक संतुलन भी बना रहे।