एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग नहीं लौटाने पर दिल्ली कोर्ट सख्त — पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह पर मुकदमा चलाने के आदेश…
देश के चर्चित कलाकार एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग को लेकर एक पुराना विवाद फिर सुर्खियों में है। दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने यह कदम उस शिकायत के बाद उठाया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिंह ने हुसैन की पेंटिंग लौटाने से इनकार कर दिया था।
अदालत का आदेश: जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शिकायत की जांच के बाद पाया कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने कहा कि पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे इस मामले की आगे जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
हुसैन की कलाकृति को लेकर विवाद
यह मामला उस समय शुरू हुआ जब मशहूर चित्रकार एम.एफ. हुसैन ने अपनी एक मूल्यवान पेंटिंग भंवर जितेंद्र सिंह को दी थी। आरोप है कि बाद में जब हुसैन या उनके प्रतिनिधियों ने पेंटिंग लौटाने को कहा, तो सिंह ने इसे वापस करने से इनकार कर दिया। इस पर हुसैन के परिवार और सहयोगियों ने कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
भंवर जितेंद्र सिंह का पक्ष: राजनीतिक साजिश का दावा
पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि वह जांच में सहयोग करने को तैयार हैं और अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
कला जगत में चर्चा: हुसैन की विरासत पर सवाल
एम.एफ. हुसैन भारतीय आधुनिक कला के सबसे चर्चित नामों में से एक रहे हैं। उनकी पेंटिंग्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊंचे दामों पर बिकती रही हैं। इस विवाद ने एक बार फिर कला संपत्ति के स्वामित्व और उसकी कानूनी स्थिति पर बहस छेड़ दी है।
कला, राजनीति और कानून का संगम
यह मामला केवल एक पेंटिंग के स्वामित्व का नहीं, बल्कि कला, नैतिकता और कानून के बीच संतुलन की परख भी है। अदालत का यह निर्णय न केवल कलाकारों की बौद्धिक संपत्ति की रक्षा को मजबूती देगा, बल्कि राजनीतिक हस्तियों को भी यह संदेश देगा कि कानून सबके लिए समान है।
दिल्ली कोर्ट का यह फैसला कला जगत और राजनीति दोनों में हलचल मचाने वाला है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई कला विरासत की सुरक्षा और बौद्धिक संपत्ति के अधिकारों पर अहम नज़ीर बन सकती है।