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दिल्ली कार ब्लास्ट: नए खुलासों ने हिला दी जांच एजेंसियां, लाल किले की पार्किंग से नेताजी सुभाष मार्ग तक ‘मिनट-टू-मिनट’ साजिश बेनकाब…

तीन घंटे कार में बंद रहा उमर — साजिश की नई टाइमलाइन उजागर

जांच में सामने आया है कि कार बम धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर मोहम्मद उर्फ उमर उन-नबी करीब तीन घंटे तक लाल किले के नजदीक सुनेहरी मस्जिद की पार्किंग में कार के अंदर ही बैठा रहा।
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, उमर दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में दाखिल हुआ और 6:28 बजे वहां से निकला, लेकिन इस पूरी अवधि में वह एक बार भी कार से बाहर नहीं निकला।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसी दौरान कार में विस्फोटक डिवाइस असेंबल किया गया।

भीड़ कम होने से बदला प्लान — पार्किंग में धमाका टाल दिया

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में उमर का इरादा पार्किंग में ही धमाका करने का था।
लेकिन सोमवार होने के कारण लाल किला बंद था और पार्किंग लगभग खाली थी, जिससे विस्फोट से ज्यादा नुकसान नहीं होता।
इसी वजह से उसने प्लान बदल दिया और भीड़भाड़ वाले स्थान की तरफ बढ़ गया।

25 मिनट बाद नेताजी सुभाष मार्ग पर धमाका — भीड़ को बनाया निशाना

पार्किंग से 6:28 बजे निकलने के बाद ठीक 25 मिनट बाद 6:52 बजे नेताजी सुभाष मार्ग पर विस्फोट हुआ।
यह स्थान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है — एक ओर लाल किला और दूसरी ओर चांदनी चौक का व्यस्त बाजार।
जांच में यह भी सामने आया है कि अपने साथियों मुजम्मिल और शाहीन (दोनों डॉक्टर) की गिरफ्तारी के बाद उमर मानसिक रूप से दबाव में था और जल्दबाजी में यह हमला अंजाम दिया।

फरीदाबाद के 2,900 किलो विस्फोटक केस से भी जुड़ते तार

इस ब्लास्ट की कड़ी फरीदाबाद में बरामद 2,900 किलो विस्फोटक से भी जुड़ रही है।
दो सहयोगियों के पकड़े जाने के बाद उमर को शक हुआ कि उसका नेटवर्क उजागर हो सकता है, इसलिए उसने योजना के समय और स्थान में अचानक बदलाव किया।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी केस — चेयरमैन जवाद सिद्दीकी 13 दिन की ईडी हिरासत में

इधर समानांतर कार्रवाई में मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े मामले में ईडी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की हिरासत में भेज दिया है।
₹415 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के इस केस में स्थिति इतनी गंभीर थी कि आधे रात जज के आवास पर अदालत लगानी पड़ी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने रात करीब 1 बजे तक चली कार्यवाही के बाद हिरासत स्वीकृत की।

क्या बताता है यह पूरा घटनाक्रम?

उमर का तीन घंटे कार से न निकलना संकेत देता है कि डिवाइस वहीं असेंबल किया गया।

हमले की रणनीति आखिरी मिनट में स्थान बदलने से साफ है कि वह नुकसान अधिकतम करने के उद्देश्य से चल रहा था।

साथी आतंकियों की गिरफ्तारी से बढ़े दबाव ने उसे घबराकर जल्दबाजी में हमला करने के लिए प्रेरित किया।

दूसरी ओर जवाद सिद्दीकी की आधी रात में पेशी दर्शाती है कि एजेंसियां बड़े नेटवर्क को एक साथ पकड़ने की कोशिश कर रही हैं।

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