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“दिल्ली–अलवर RRTS: गुरुग्राम बाधा दूर, प्रोजेक्ट को मिली राहत”

गुरुग्राम में फंसा पेंच सुलझा, दिल्ली–अलवर नमो भारत कॉरिडोर की रफ्तार बढ़ने को तैयार

दिल्ली–अलवर रीजनल रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट को गुरुग्राम क्षेत्र में फंसा प्रमुख तकनीकी पेंच आखिरकार सुलझता दिख रहा है। एंबियंस मॉल से इफको चौक तक लगी हाईटेंशन लाइनें लंबे समय से कॉरिडोर के निर्माण में बाधा थीं। अब हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (HVPNL) ने इन लाइनों को शिफ्ट करने के लिए लगभग 65 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर NCRTC को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू हो जाएगा, जिससे कॉरिडोर निर्माण की रफ्तार तेज होना तय है।

164 किमी लंबा सेमी-हाई-स्पीड कॉरिडोर

दिल्ली से अलवर को जोड़ने वाला यह RRTS कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई प्रमुख शहरों—दिल्ली, गुरुग्राम, रेवाड़ी, नीमराणा और अलवर—को जोड़ेगा।
परियोजना की कुल लंबाई करीब 164 किलोमीटर है, जिसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है।
पहले चरण में दिल्ली से बावल तक का हिस्सा बनकर तैयार किया जाएगा।

शुरुआत में RRTS का प्रस्तावित मार्ग पुरानी दिल्ली रोड से गुजरता था, लेकिन बाद में इसे दिल्ली–जयपुर नेशनल हाइवे के समानांतर शिफ्ट किया गया।
इसी इलाके में कई हाईटेंशन लाइनों के होने से निर्माण कार्य काफी समय से रुका हुआ था।
लाइनें हटने के बाद अब बाधाएँ लगभग खत्म मानी जा रही हैं।

गुरुग्राम विवाद सुलझने से परियोजना के सबसे बड़े अवरोध पर प्रगति नजर आने लगी है ,
अब जल्द ही NCR के दक्षिणी हिस्से में तेजी से कंस्ट्रक्शन शुरू होने की संभावना बन गई है ,
अब दिल्ली–अलवर के बीच तेज, आधुनिक और भरोसेमंद कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है । इस प्रोजेक्ट से नीमराणा–अलवर इंडस्ट्रियल क्षेत्र को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद देखी जा रही है ।

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