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रक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा, लेफ्टिनेंट कर्नल की गिरफ्तारी से हड़कंप…….

देश की सुरक्षा से जुड़े अहम विभाग में तैनात एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पर सीबीआई की कार्रवाई ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग में कार्यरत लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को रिश्वतखोरी और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने से मामला और भी सनसनीखेज हो गया है।


रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया लेफ्टिनेंट कर्नल

सीबीआई ने लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को एक निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी से तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि आरोपी अधिकारी ने दुबई स्थित एक कंपनी की खेप को संयुक्त अरब अमीरात भेजने के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी दिलाने के बदले यह रकम ली थी। इस मामले में रिश्वत देने वाले कंपनी प्रतिनिधि विनोद कुमार को भी हिरासत में लिया गया है।


विदेश भेजी जाने वाली खेप को लेकर रची गई साजिश

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, दीपक शर्मा ने निजी कंपनी के दो कर्मचारियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची। इस साजिश का मकसद रक्षा से संबंधित सामग्री की खेप को नियमों की अनदेखी करते हुए विदेश भेजना था। एजेंसी का कहना है कि सरकारी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाया गया।


छापेमारी में 2.36 करोड़ रुपये नकद बरामद

सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी कर 2.36 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की है। इसके अलावा, एक दिन पहले श्रीगंगानगर में उसकी पत्नी के आवास से भी 10 लाख रुपये नकद मिले थे। इतनी भारी मात्रा में नकदी मिलने से अवैध आय और भ्रष्टाचार के आरोप और मजबूत हो गए हैं।


पत्नी कर्नल काजल बाली भी जांच के घेरे में

इस मामले में दीपक शर्मा की पत्नी कर्नल काजल बाली को भी सह-आरोपित बनाया गया है। वह वर्तमान में श्रीगंगानगर में 16वें इन्फैंट्री डिवीजन की आयुध इकाई की कमांडिंग अधिकारी हैं। उनके आवास से नकदी मिलने के बाद उनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है।


रक्षा उत्पादन विभाग में अहम जिम्मेदारी संभाल रहा था आरोपी

लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निर्यात से जुड़ी उप-योजना का प्रभारी अधिकारी था। इस पद के कारण उसे रक्षा उत्पादों के निर्माण, निर्यात और निजी कंपनियों के साथ समन्वय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिससे उसे संवेदनशील जानकारियों तक सीधी पहुंच थी।


लंबे समय से अवैध गतिविधियों में लिप्त होने का दावा

सीबीआई का दावा है कि आरोपी अधिकारी लंबे समय से निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत ले रहा था। एजेंसी को पहले से इनपुट मिल रहे थे कि रक्षा निर्यात से जुड़ी मंजूरियों में गड़बड़ी की जा रही है। अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच तेज कर दी गई है।


जांच जारी, और बड़े खुलासों के संकेत

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करना है।

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