Defence Budget 2026: रक्षा पर अब तक का सबसे बड़ा दांव, भारतीय सेना की ताकत में रिकॉर्ड इज़ाफा
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय के लिए रिकॉर्ड 7.8 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह बीते वर्ष की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत अधिक है। इस बजट का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करना है।
आधुनिकीकरण पर फोकस: सेना को मिलेंगे राफेल, पनडुब्बियां और हाई-टेक ड्रोन
रक्षा बजट में से 2.19 लाख करोड़ रुपये सिर्फ सैन्य आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस राशि से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उन्नत हथियार प्रणालियां, राफेल फाइटर जेट्स, अत्याधुनिक पनडुब्बियां और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (ड्रोन) खरीदे जाएंगे। इससे भारत की स्ट्राइक क्षमता और निगरानी प्रणाली को बड़ी मजबूती मिलेगी।
पिछले साल की तुलना में कितना बढ़ा रक्षा बजट
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार,
डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) के लिए: ₹3,65,478.98 करोड़
कैपिटल आउटले (आधुनिकीकरण) के लिए: ₹2,19,306.47 करोड़
रक्षा पेंशन के लिए: ₹1,71,338 करोड़
रक्षा मंत्रालय (सिविल) के लिए: ₹28,554.61 करोड़
यह आवंटन सेना की मौजूदा जरूरतों और भविष्य की रणनीतिक तैयारियों—दोनों को ध्यान में रखकर किया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा रक्षा खर्च का भरोसा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सशस्त्र बलों की भूमिका और अहम हो गई थी। इसके चलते रक्षा खर्च में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही थी, जिस पर बजट में मुहर लगती दिखाई दे रही है। यह 1971 के बाद पाकिस्तान के साथ पहली बड़ी सैन्य झड़प के बाद रक्षा तैयारियों में सबसे बड़ा वित्तीय समर्थन माना जा रहा है।
2047 का लक्ष्य: आत्मनिर्भर और विकसित भारत की मजबूत नींव
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आवंटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूती देता है। उन्होंने कहा कि यह बजट 2047 तक भारत को न सिर्फ सुरक्षित बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में अहम कदम है।
तीनों सेनाओं के मॉडर्नाइजेशन के लिए विशेष प्रावधान
रक्षा मंत्री ने बताया कि इस बजट में तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सेनाओं के कुल कैपिटल खर्च के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये और मॉडर्नाइजेशन के लिए लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे हथियार, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई मिलेगी।
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा: कस्टम ड्यूटी में राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स के निर्माण के लिए आयात होने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी। इससे देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता का संतुलित बजट
कुल मिलाकर रक्षा बजट 2026-27 को राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाने वाला बजट माना जा रहा है। यह न केवल सेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।