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4 साल बाद कच्चा तेल 60 डॉलर से नीचे, पेट्रोल-डीजल सस्ते होने के आसार


फरवरी 2021 के बाद पहली बार भारत का कच्चा तेल बास्केट 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गया है। जनवरी 2026 में यह 59.92 डॉलर पर पहुंच गया। इस गिरावट से सवाल उठ रहा है—क्या आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है?


🔹 कच्चा तेल की हालिया कीमतें

  • दिसंबर 2025: 62.2 डॉलर प्रति बैरल
  • जनवरी 2026: 59.92 डॉलर प्रति बैरल

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, जून 2026 तक कच्चा तेल 50 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी नीचे जा सकता है। मार्च तक यह कीमत 53.31 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है।


🔹 पेट्रोल-डीजल पर संभावित असर

भारत में फ्यूल की कीमतें रोजाना बदलती रहती हैं और तेल कंपनियों के फैसले पर निर्भर करती हैं। कच्चा तेल सस्ता होने से पेट्रोल और डीजल के रेट घट सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला टैक्स और सरकारी नीति पर भी निर्भर करेगा।


🔹 भारत के लिए महत्व

भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की गिरावट से सरकार को सालाना लगभग 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।


🔹 गिरावट के कारण

  • अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेल की सप्लाई जरूरत से ज्यादा
  • मांग उतनी मजबूत नहीं
  • साल 2026 तक सप्लाई मांग से करीब 38.5 लाख बैरल/दिन अधिक रहने का अनुमान

ब्रेंट क्रूड 60.22 डॉलर और अमेरिकी WTI 56.48 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहे हैं, जिससे भारत पर भी असर पड़ता है।


🔹 सरकार और अर्थव्यवस्था को फायदा

  • तेल आयात सस्ता होने से सरकार का खर्च कम
  • राजकोषीय घाटा कम करने में मदद
  • महंगाई पर नियंत्रण
  • इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए ज्यादा बजट

🔹 नतीजा

अगर अंतरराष्ट्रीय मार्केट में यही रुझान बना रहता है, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल के रेट घट सकते हैं। आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च में राहत मिलने के साथ महंगाई का बोझ भी कम होगा।

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