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इंडिया गेट पर विवादित नारेबाज़ी: जेएनयू छात्रों पर गंभीर आरोप, मिर्ची स्प्रे से हमला भी…

राजधानी दिल्ली का इंडिया गेट सोमवार को अचानक तनावपूर्ण माहौल में बदल गया, जब प्रदूषण के विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा कथित तौर पर नक्सली कमांडर हिड़मा के समर्थन में नारे लगाने का आरोप लगा। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो मिर्ची स्प्रे से हमला किए जाने की बात सामने आई। आखिर ऐसी नारेबाज़ी देश की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या सवाल खड़े करती है?
इंडिया गेट पर विवादित नारेबाज़ी का आरोप

दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदूषण के विरोध में जुटे कुछ छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से “काॅमरेड हिड़मा अमर रहे” जैसे नारे लगाए। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इससे वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और आम लोगों में तनाव का माहौल बन गया।

पुलिस ने रोका तो मिर्ची स्प्रे से हमला

पुलिस ने जब इन छात्रों को रोकने की कोशिश की, तो उन पर मिर्ची स्प्रे से हमला किए जाने की शिकायत दर्ज हुई। अधिकारियों के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारी अचानक आक्रामक हो गए और मौके से हटाने का विरोध करने लगे।

हिड़मा—वह नाम जिसके पीछे खड़ी हैं दर्जनों वारदातें

हिड़मा को सुरक्षा एजेंसियां कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड बताती रही हैं। उस पर घात लगाकर सुरक्षा बलों पर हमले, जवानों की हत्या और बड़े पैमाने पर हिंसा के आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसे नाम के समर्थन में नारे लगने से पूरा घटनाक्रम और विवादास्पद हो गया।

जेएनयू कैंपस में पहले भी उठे विवादित नारे—पुराना विवाद फिर चर्चा में

यह मामला सामने आते ही 2016 के पुराने विवाद फिर चर्चा में आ गए, जब अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाने का आरोप लगा था। उस समय भी केस दर्ज हुए थे और राजनीतिक तौर पर बड़ी हलचल मची थी। यह घटना उसी पृष्ठभूमि को फिर ताज़ा कर गई।

राजनीतिक गलियारों में पुरानी बहसों की वापसी

पूर्व में हुए विवादों के दौरान कई बड़े राजनीतिक नेताओं द्वारा छात्रों को समर्थन देने की यादें भी सोशल मीडिया में फिर ताज़ा होने लगीं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है, क्योंकि वे अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर नक्सल हिंसा से निपटते हैं।

मुख्य सवाल—राजधानी में ऐसी नारेबाज़ी कैसे?

देश की राजधानी और कड़ी सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह के आरोप सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं—

क्या ऐसे नारे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा लांघते हैं?

क्या यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण है?

क्या ऐसे मामलों पर विश्वविद्यालय प्रशासन को और सख्त रुख अपनाना चाहिए?

आगे क्या? पुलिस जांच में जुटी

दिल्ली पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। वीडियो फुटेज, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और छात्रों की पहचान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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