कांग्रेस ने अंता उपचुनाव में दर्ज की बड़ी जीत, वसुंधरा का जादू नहीं चला; भाजपा का जनाधार खिसकने के संकेत…
राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर हुए हाई-प्रोफाइल उपचुनाव में कांग्रेस ने शानदार वापसी करते हुए भाजपा को करारी शिकस्त दी। प्रमोद जैन भाया ने भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन को बड़े अंतर से हराया। वसुंधरा राजे की सक्रिय मौजूदगी भी भाजपा को जीत नहीं दिला सकी। नतीजों ने साफ किया कि राज्य में दो साल पुरानी भाजपा सरकार की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है।
अंता उपचुनाव: कौन कितना जीता-हारा (आधिकारिक वोट गणना)
प्रमोद जैन भाया – कांग्रेस: 69,571 वोट (विजेता)
मोरपाल सुमन – भाजपा: 53,959 वोट
नरेश मीणा – निर्दलीय: लगभग 53,800 वोट
जीत का अंतर: लगभग 15,612 वोट
यह उपचुनाव तब हुआ जब भाजपा के पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की 2005 के एक मामले में सजा तय होने के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई।
वसुंधरा राजे का करिश्मा क्यों नहीं चला?
युवा और स्थानीय मुद्दों पर कांग्रेस का नेरेटिव अधिक प्रभावी रहा वही भाजपा की राज्य सरकार के कामकाज से मतदाता पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे ,हालांकि वसुंधरा राजे सहित मुख्यमंत्री भजन लाल भी सक्रिय रहे लेकिन चुनाव नहीं जीता पाए ।
क्या राजस्थान में भाजपा का जनाधार दो साल में कम हुआ?
उपचुनाव परिणामों के आधार पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि—ग्रामीण इलाकों में नाराजगी दिखाई दी , रोजगार व महंगाई प्रमुख मुद्दे रहे , कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मिलकर भाजपा के वोट आधार में सेंध लगाई , लेकिन यह उपचुनाव स्पष्ट संकेत देता है कि भाजपा के लिए 2028 की लड़ाई आसान नहीं रहने वाली है।
अंता उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं था — यह राजस्थान की राजनीतिक दिशा का संकेतक बना।
कांग्रेस ने जीतकर दो साल पुरानी भाजपा सरकार को संदेश दिया । भाजपा को यह हार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर करेगी यहां वसुंधरा राजे की लोकप्रियता भी इस बार सीट नहीं बचा सकी
इस चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार नरेश मीणा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर भाजपा-कांग्रेस दोनों पर असर जरूर डाला…आखिर प्रमोद भाया बाजी मार ले गए ।