अरावली बचाने सड़क पर उतरेगी कांग्रेस, अलवर में आज ‘सेव अरावली’ जन जागरण अभियान, कटी घाटी से सचिवालय तक रैली…..
अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गर्माने वाली है। कांग्रेस पार्टी शनिवार को अलवर में बड़े स्तर पर ‘सेव अरावली’ जन जागरण अभियान चलाने जा रही है। इस अभियान के तहत कटी घाटी से सचिवालय तक विशाल रैली निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार अरावली की परिभाषा बदलकर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रही है।
अरावली संरक्षण को लेकर कांग्रेस का जन जागरण अभियान
कांग्रेस पार्टी ने अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए अलवर को केंद्र बनाते हुए जन जागरण अभियान की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि अरावली सिर्फ पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि राजस्थान और उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। इसी मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे।
प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व रहेगा मौजूद
इस अभियान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, एआईसीसी महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह सहित कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में होने वाले इस कार्यक्रम को पार्टी की बड़ी ताकत प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित और पर्यावरण से जुड़ा आंदोलन बता रही है।
कटी घाटी से सचिवालय तक निकलेगी रैली
अभियान की शुरुआत शनिवार दोपहर करीब 2 बजे अलवर शहर के प्रवेश द्वार कटी घाटी से होगी। यहां कांग्रेस कार्यकर्ता और आमजन एकत्रित होंगे। इसके बाद रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सचिवालय पहुंचेगी, जहां प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
अरावली राजस्थान की जीवनरेखा—टीकाराम जूली
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली राजस्थान की जीवनरेखा है और इसे ‘माता’ के समान सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अरावली मरुस्थल के विस्तार को रोकने, तापमान संतुलन बनाए रखने और भूजल संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है। अगर अरावली कमजोर हुई, तो इसका सीधा असर प्रदेश की जलवायु और जनजीवन पर पड़ेगा।
सरकार पर परिभाषा बदलकर गुमराह करने का आरोप
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अरावली की परिभाषा में बदलाव कर जनता को भ्रमित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि इस संशोधन से करीब 68 हजार हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होगा, लेकिन हकीकत में इससे कहीं बड़े इलाके में खनन और व्यावसायिक गतिविधियों के रास्ते खुल सकते हैं।
खनन बढ़ा तो पर्यावरण पर गंभीर असर—कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अरावली क्षेत्र में खनन बढ़ने से जंगल, वन्यजीव, जल स्रोत और वायु गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह केवल अलवर या राजस्थान की समस्या नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए खतरा बन सकती है। इसी आशंका के चलते ‘सेव अरावली अभियान’ को व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।
कलेक्टर को सौंपा जाएगा ज्ञापन, आंदोलन और तेज करने के संकेत
कांग्रेस ने साफ किया है कि रैली के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की जाएगी। यदि सरकार ने जनभावनाओं को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। पार्टी का दावा है कि इस अभियान में बड़ी संख्या में आमजन भी शामिल होंगे।