भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ कांग्रेस का मोर्चा, भोपाल में किसानों के साथ बड़ा शक्ति प्रदर्शन
भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी का आरोप है कि यह समझौता देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों के खिलाफ है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस भोपाल में किसानों के साथ बड़ा जनसंवाद करने जा रही है।
भोपाल में ‘किसान महा चौपाल’, राहुल गांधी और खरगे करेंगे किसानों से संवाद
मंगलवार को भोपाल के जवाहर चौक पर कांग्रेस का बड़ा आयोजन ‘किसान महा चौपाल’ होगा। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी किसानों से सीधा संवाद करेंगे। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इस मंच के जरिए किसानों को ट्रेड डील से जुड़ी चिंताओं और संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
गांव-गांव पहुंचकर समझाने की रणनीति, पार्टी कार्यकर्ता होंगे एक्टिव
कांग्रेस ने इस आयोजन को व्यापक जनसंपर्क अभियान से जोड़ने की योजना बनाई है। पार्टी पदाधिकारी गांवों और कस्बों में जाकर किसानों को यह बताएंगे कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का खेती-किसानी, फसल कीमतों और स्थानीय बाजारों पर क्या असर पड़ सकता है। नेताओं का कहना है कि महा चौपाल के बाद जमीनी स्तर पर संवाद को और तेज किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस नेताओं की अपील, सोशल मीडिया के जरिए जुटाया जा रहा समर्थन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए किसानों और आम नागरिकों से भोपाल पहुंचने की अपील की है। नेताओं का दावा है कि ट्रेड डील के बाद कपास, सोयाबीन, मक्का और सरसों जैसी फसलों के दामों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
विधानसभा में भी उठा मुद्दा, ट्रेड डील को बताया किसानों के लिए जोखिम
मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने अंतरिम ट्रेड डील को लेकर विरोध दर्ज कराया है। पार्टी का कहना है कि इस तरह के समझौतों से कृषि बाजारों में असंतुलन पैदा हो सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। कांग्रेस ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति की मांग की है।
भारत-अमेरिका अंतरिम समझौता: टैरिफ ढांचे पर बनी रूपरेखा
भारत और अमेरिका के बीच कई महीनों की बातचीत के बाद अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी है। इसके तहत टैरिफ ढांचे में बदलाव की बात कही गई है। वहीं, अमेरिका में टैरिफ को लेकर कानूनी प्रक्रिया और नीतिगत फैसलों पर बहस जारी है, जिसका वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।