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कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, 25 साल पुराने बैंक घोटाले में MP-MLA कोर्ट का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई है। दतिया से विधायक भारती को 25 साल पुराने भूमि विकास सहकारी बैंक घोटाले में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने सजा के साथ जुर्माना भी लगाया है, हालांकि साथ ही उन्हें जमानत मिलने से तत्काल जेल जाने से राहत मिल गई है।

कोर्ट का सख्त रुख, साजिश और धोखाधड़ी में दोषी करार

Rajendra Bharti को एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष बेंच ने भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश (धारा 120B), धोखाधड़ी (420), जालसाजी (467, 468) और फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल (471) का अपराधी माना। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जो आरोपों को साबित करते हैं। इसी केस में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है।

25 साल पुराना बैंक घोटाला बना सजा की वजह

यह मामला Datia जिले के भूमि विकास सहकारी बैंक से जुड़ा है, जहां राजेंद्र भारती उस समय अध्यक्ष पद पर थे। आरोप है कि उन्होंने बैंक के एक कर्मचारी के साथ मिलकर लगभग 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में गड़बड़ी की। दस्तावेजों में हेरफेर कर एफडी की अवधि बढ़ाई गई और अधिक ब्याज दर का फायदा उठाकर राशि निकाली जाती रही। यह मामला वर्षों पुराना होने के बावजूद जांच और सुनवाई के बाद अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचा।

चुनावी जीत के बाद आया बड़ा झटका

राजेंद्र भारती हाल ही में उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने विधानसभा चुनाव में Narottam Mishra को हराकर दतिया सीट से जीत दर्ज की थी। इस जीत के बाद उन्हें कांग्रेस का मजबूत चेहरा माना जा रहा था, लेकिन अब कोर्ट के फैसले ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सजा का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

सजा के साथ मिली राहत, लेकिन बढ़ा खतरा

कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाने के साथ ही राजेंद्र भारती को जमानत भी दे दी है, जिससे उन्हें तत्काल जेल नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि कानून के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में उनकी विधायकी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यह स्थिति उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

आगे की कानूनी लड़ाई के विकल्प खुले

हालांकि सजा के बावजूद राजेंद्र भारती के पास अभी कानूनी विकल्प मौजूद हैं। वे उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं और सजा पर स्थगन (स्टे) की मांग कर सकते हैं। यदि उन्हें राहत मिलती है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है। फिलहाल इस फैसले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस मामले पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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