CJI सूर्य कांत की एंट्री: Article 370 से Pegasus तक… अब सुप्रीम कोर्ट की नई दिशा तय करेंगे…
“ऐसे फैसले, जिनसे बदल गया न्याय का नजरिया”
जस्टिस सूर्य कांत आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेकर सुर्खियों में हैं। संवैधानिक केसों से लेकर राष्ट्र सुरक्षा, चुनावी पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दों पर उन्होंने जो फैसले दिए, वही अब उनके CJI कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान बनेंगे। देश की नज़रें इस बात पर हैं कि आने वाले महीनों में सुप्रीम कोर्ट किन मामलों पर नई दिशा तय करेगा।
Article 370 पर निर्णायक भूमिका
जस्टिस सूर्य कांत उस संविधान पीठ का हिस्सा रहे, जिसने जम्मू-कश्मीर से Article 370 हटाने को संवैधानिक माना। यह फैसला देश की एकता, संघवाद और संवैधानिक पुनर्रचना के लिहाज से ऐतिहासिक माना गया। यहीं से उनकी छवि एक संतुलित और दूरदर्शी न्यायाधीश के रूप में मजबूत हुई।
राजद्रोह कानून (Sedition) पर बड़ी रोक
धारा 124A यानी राजद्रोह कानून पर पुनर्समीक्षा चलने तक FIR दर्ज न करने का आदेश देने वाली बेंच में भी सूर्य कांत शामिल थे। यह कदम नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा की दिशा में सबसे साहसी हस्तक्षेपों में से एक माना गया।
Pegasus जांच: पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र समिति
Pegasus स्पाइवेयर विवाद में जस्टिस सूर्य कांत ने उस आदेश में अहम भूमिका निभाई, जिसमें सरकार से अलग, एक स्वतंत्र टेक्निकल समिति बनाने का निर्देश दिया गया। यह फैसला दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर निगरानी की कार्रवाई न्यायिक जांच से मुक्त नहीं हो सकती।
बिहार मतदाता सूची मामला: 65 लाख वोटरों पर पारदर्शिता का आदेश
बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए लाखों नामों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देकर उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को मजबूत किया। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से चुनाव आयोग की जवाबदेही पर भी बड़ा संदेश गया।
महिलाओं के अधिकार और जेंडर जस्टिस पर मजबूत स्टैंड
जस्टिस सूर्य कांत ने महिला सरपंच को अवैध रूप से हटाने के फैसले को रद्द कर लोकतांत्रिक अधिकार बहाल किए। उन्होंने बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का आदेश भी दिया—जो न्यायपालिका और वकालत दोनों में जेंडर बैलेंस की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
राज्य–केंद्र संबंध और गवर्नर की शक्तियों पर स्पष्ट दृष्टिकोण
गवर्नर द्वारा विधानसभा में पारित बिलों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में “अनियंत्रित अधिकार” न होने का सिद्धांत स्थापित करते हुए उन्होंने संघीय संतुलन की नई परिभाषा दी। यह फैसला केंद्र–राज्य संबंधों को स्पष्ट दिशा देता है।
OROP और महिला सैन्य अधिकारियों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण निर्णय
OROP योजना को संवैधानिक ठहराकर उन्होंने पूर्व सैनिकों के हितों की रक्षा की। साथ ही महिला सैन्य अधिकारियों की स्थायी कमीशन की मांग को गंभीरता से सुनने का निर्देश देकर सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की राह को मजबूत किया।
बैंक–डेवलपर घोटाला: हाउसिंग सेक्टर में जवाबदेही की मांग
जस्टिस सूर्य कांत ने गृह-खरीदारों को धोखा देने वाले बैंक और बिल्डर के गठजोड़ पर कड़ा रुख अपनाया और CBI जांच का रास्ता साफ किया। यह फैसला न्यायपालिका की आम नागरिकों के हित में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
“नए CJI से बड़ी उम्मीदें”
जस्टिस सूर्य कांत के फैसले साफ दिखाते हैं कि वे सिर्फ कानून की किताब नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को केंद्र में रखकर न्याय देने में विश्वास करते हैं। अब, देश की नजरें उनके CJI कार्यकाल पर टिकी हैं—जहां पारदर्शिता, संविधान और नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे उनका इंतजार कर रहे हैं।