चीन की तेज़ एयर पावर तैयारी: J-20 और J-35 से बढ़ेगा दबाव, IAF के लिए क्यों अहम है यह संकेत?
▶️ एशिया में बदलता सामरिक संतुलन
चीन की वायुसेना कर रही है आक्रामक विस्तार
चीन अपनी वायुसेना को अभूतपूर्व गति से मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह J-20 और J-35 जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स की संख्या तेजी से बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में चीन के पास 1300 से ज्यादा फाइटर जेट्स हो सकते हैं, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
▶️ J-20 और J-35 की भूमिका
स्टील्थ तकनीक से बढ़ेगी मारक क्षमता
J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है, जबकि J-35 को नौसेना और बहुउद्देश्यीय अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है। इन दोनों विमानों की बड़ी संख्या में तैनाती से चीन की डीप-स्ट्राइक और एयर-डॉमिनेंस क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है।
▶️ भारतीय वायुसेना पर असर
IAF की रणनीति क्यों हो रही है अहम
चीन की इस तैयारी का सीधा असर भारतीय वायुसेना (IAF) की दीर्घकालिक रणनीति पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी फाइटर स्क्वॉड्रन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और स्वदेशी प्रोजेक्ट्स को तेज़ करने की जरूरत और ज्यादा महसूस होगी।
▶️ भारत की मौजूदा स्थिति
स्क्वॉड्रन संख्या और भविष्य की चुनौती
IAF लंबे समय से फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी से जूझ रही है। हालांकि राफेल, तेजस और अपग्रेडेड सुखोई जैसे प्लेटफॉर्म्स से ताकत बढ़ी है, लेकिन चीन की तेज़ रफ्तार तैयारी भारत के लिए एक रणनीतिक चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है।
▶️ सरकारी स्तर पर मंथन
नई खरीद और स्वदेशी विकल्पों पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार अतिरिक्त फाइटर जेट्स की जरूरत को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें विदेशी प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) जैसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देना भी शामिल है।
सिर्फ संख्या नहीं, तकनीक भी निर्णायक
सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य की हवाई जंग केवल विमानों की संख्या से नहीं, बल्कि स्टील्थ, सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और पायलट ट्रेनिंग से तय होगी। ऐसे में चीन की तैयारी भारत के लिए अलर्ट सिग्नल जरूर है, लेकिन रणनीतिक संतुलन अभी पूरी तरह बिगड़ा नहीं है।
▶️ आगे की राह
IAF के लिए निर्णायक दशक
आने वाला दशक भारतीय वायुसेना के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सही समय पर फैसले, तेज़ खरीद प्रक्रिया और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा भारत को इस चुनौती का जवाब देने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।