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अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जमीन घोटाले में घिरे

दिल्ली में जमीन कब्जे के एक हाई-प्रोफाइल मामले ने नया मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी पर मृत हिंदू जमींदारों के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों की जमीन हड़पने का आरोप है। पूरा मामला शिक्षा संस्थान के नाम पर किए गए बड़े फर्जीवाड़े से जुड़ा बताया जा रहा है।

चांसलर जावेद सिद्दीकी ED हिरासत में

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी फिलहाल ED की हिरासत में हैं। उन्हें 18 नवंबर को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले एजेंसी ने यूनिवर्सिटी के दफ्तरों और प्रमोटरों के ठिकानों सहित 25 स्थानों पर छापेमारी की थी।

फर्जीवाड़े का आरोप | मृत हिंदू जमींदारों के नाम पर बनी नकली GPA

ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के मदनपुर खादर में खसरा नंबर 792 की जमीन पर कब्जा करने के लिए 7 जनवरी 2004 को एक जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) तैयार की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन हिंदू जमींदारों के नाम इस दस्तावेज में दर्ज थे, वे 1972 से 1998 के बीच ही मर चुके थे। इसके बावजूद उनके नाम पर नया दस्तावेज बनाकर जमीन को दोबारा रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया गया।

ट्रस्ट का कनेक्शन | तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन पर भी सवाल

जांच में पाया गया कि यह जमीन तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन के नाम ट्रांसफर कराई गई, जो सीधे तौर पर सिद्दीकी से जुड़ा एक ट्रस्ट है। ईडी ने इस पूरे ट्रांसफर को “धोखाधड़ी आधारित कब्जा” करार दिया है और कहा है कि इस कब्जे की नींव ही फर्जी कागजात थे।

ईडी की कार्रवाई | 25 जगहों पर छापे, कई दस्तावेज जब्त

एजेंसी ने सिद्दीकी और उनके सहयोगियों से जुड़े विभिन्न परिसरों में छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े पेपर सीज किए हैं। ईडी का दावा है कि फर्जी GPA के ज़रिए जमीन हड़पने की यह गहरी साजिश लंबे समय तक चली।

शिक्षा के नाम पर ‘जमीन का खेल’?

यह पूरा मामला इस सवाल को खड़ा करता है कि क्या शिक्षा संस्थान की आड़ में जमीन कब्जे का बड़ा खेल खेला गया?
– मृत व्यक्तियों के नाम से दस्तावेज तैयार करना
– जमीन का दोबारा पंजीकरण
– ट्रस्ट के माध्यम से स्वामित्व बदलना
ये सभी तथ्य इस ओर इशारा करते हैं कि मामला सिर्फ जमीन हड़पने का नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े सिंडिकेट से भी जुड़ा हो सकता है। ईडी की आगे की जांच से और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

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